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50Yrs Of Naya Din Nai Raat: दिलीप कुमार की उम्मीदों पर सौ फीसदी खरे उतरे संजीव कुमार, भीम सिंह की कालजयी फिल्म

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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला
फिल्म ‘नया दिन नई रात’ की शुरुआत दिलीप कुमार की आवाज से होती है। दरअसल, ये फिल्म इसके निर्देशक ए भीम सिंह दिलीप कुमार के साथ ही बनाना चाहते थे। 30 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म निर्देशित करने वाले भीम सिंह ने 24 साल में कुल 76 फिल्में बनाईं। इनमें से 34 फिल्मे उनकी तमिल में, 18 हिंदी में, आठ तेलुगु में, पांच मलयालम में और एक कन्नड़ भाषा में रही। भीमसिंह निर्देशित फिल्म ‘नया दिन नई रात’ 10 मई 1974 को रिलीज हुई। विकीपीडिया पर इस फिल्म की रिलीज डेट 7 मई 1974 बताई गई है, जो ठीक नहीं है। ये तारीख फिल्म को सेंसर सर्टिफिकेट जारी करने की तारीख है।
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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दिलीप कुमार ने कर दिया इनकार
साल 1970 में दिलीप कुमार के साथ सुपरहिट फिल्म ‘गोपी’ बनाने के बाद निर्देशक ए भीमसिंह ने अगले तीन साल में विनोद खन्ना और संजय खान के साथ ‘सब का साथी’, राजेश खन्ना के साथ ‘मालिक’ व ‘जोरू का गुलाम’ और धर्मेंद्र के साथ ‘लोफर’ जैसी चर्चित फिल्में बनाईं। फिल्म ‘नया दिन नई रात’ लेकर भीम सिंह सबसे पहले दिलीप कुमार के पास ही गए। ‘गोपी’ के अलावा दिलीप कुमार की फिल्म ‘आदमी’ का निर्देशन भी भीम सिंह ने ही किया था, लेकिन दिलीप कुमार ने इस फिल्म में काम करने से मना कर दिया।
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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नाट्य शास्त्र के नौ रस और संजीव कुमार
दरअसल दिलीप कुमार का वक्त परदे पर एंग्री यंगमैन का अवतार होने के साथ ही ढलना शुरू हो चुका था। फिल्म ‘नया दिन नई रात’ में काम करने के लिए मना करते वक्त दिलीप कुमार ने ही संजीव कुमार का नाम इस फिल्म के लिए सुझाया और संजीव कुमार ने इस फिल्म में कालजयी अभिनय करके इस फिल्म को अमर कर दिया। नाट्य शास्त्र के सारे नौ रस, यानी कि श्रृंगार, हास्य, करुण, रौद्र, वीर, भयानक, वीभत्स, अद्भुत और शांत सब संजीव कुमार ने इस फिल्म में जीकर दिखाए हैं।

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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
जया भादुड़ी ने तुरंत कर दी हां
फिल्म ‘नया दिन नई रात’ की हीरोइन हैं जया भादुड़ी। संजीव कुमार इससे पहले ‘कोशिश’ और ‘अनामिका’ में जया के साथ काम कर चुके थे और गुलजार के निर्देशन में बनी जया की फिल्म ‘परिचय’ में भी नजर आ चुके थे। निर्देशक ए भीमसिंह ने जया भादुड़ी को बताया कि फिल्म में मुख्य किरदार संजीव कुमार का हैं, लेकिन हर किरदार की कहानी उनके किरदार के होने से ही अपना रस प्रकट कर पाती है। यह सुनते ही जया तुरंत फिल्म करने को तैयार हो गईं।
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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शादी के दबाव में घर से भागी बेटी
फिल्म ‘नया दिन नई रात’ में जया भादुड़ी ने सुषमा नामक युवती का किरदार निभाया है। और उनके पिता के रोल में हैं ओम प्रकाश। पिता का दबाव है शादी करने को लेकर और एक दिन बेटी घर छोड़कर भाग जाती है। घर वापस लौटने तक वह अलग अलग लोगों से मिलती है और संजीव कुमार ही हर बार उन्हें अलग अलग गेटअप में मिलते हैं। संजीव कुमार के इन गेट अप को बनाने में जिस एक कलाकार का सबसे बड़ा योगदान रहा, वह हैं मेकअप दादा सरोश मोदी।
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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सरोश मोदी के मेकअप का कमाल
सरोश मोदी ने बिना प्रोस्थेटिक मेकअप की सहायता के यहां जो मेकअप किया वह काबिले तारीफ है। सरोश ने संजीव कुमार को फिल्म में कभी शराबी बनाया, कभी डाकू बनाया, कभी कोढ़ी तो कभी बाबा। हर गेट अप में संजीव कुमार ने अपना किरदार सौ फीसदी करके दिखाया। कम लोगों को ही पता होगा कि भारतीय सिनेमा में प्रोस्थेटिक मेकअप की शुरुआत संजीव कुमार से ही उनकी फिल्म ‘चेहरे पे चेहरा’ से मानी जाती है।
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‘नया दिन नई रात’ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
इन दो फिल्मों की रीमेक है ‘नया दिन नई रात’
फिल्म ‘नया दिन नई रात’ तमिल और तेलुगु में एक ही नाम से बनी ‘नवरात्रि’ का रीमेक है। तमिल में ये नौ रोल शिवाजी गणेशन ने किए। तेलुगु में ये करिश्मा मशहूर अभिनेता अक्कीनेनी नागेश्वर राव ने कर दिखाया। संजीव कुमार के सामने इन दोनों अभिनेताओं के किए काम का पैमाना था और उन्हें बस इसी पैमाने को पार कर दिखाना था। संजीव कुमार ने ये किया भी। फिल्म बनने के बाद भीमसिंह ने दिलीप कुमार को खुद उनके घर जाकर इस बात के लिए धन्यवाद भी दिया कि उनके अलावा अगर कोई ये किरदार कर सकता था तो वह बस संजीव कुमार ही थे।

ये पूरी फिल्म आप यूट्यूब पर यहां देख सकते हैं:
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