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50 Years Of Sholay: यहां से लिया गया गब्बर का किरदार, क्लाइमैक्स में हुआ बदलाव; ऐसे बनकर तैयार हुई शोले

Fri, 15 Aug 2025 08:47 AM IST
आराध्य त्रिपाठी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Golden Jubilee Of Sholay: रमेश शिप्पी द्वारा निर्देशित भारतीय सिनेमा की यादगार फिल्म ‘शोले’ को रिलीज हुए आज 50 साल पूरे हो गए हैं। फिल्म की गोल्डेन जुबली पर जानते हैं फिल्म से जुड़े कुछ अनसुने किस्से।
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शोले के 50 साल - फोटो : अमर उजाला

भारतीय सिनेमा के सौ साल से भी ज्यादा के सफर में कुछ ही फिल्में ऐसी हैं, जो सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि हमारी आम जिंदगी का हिस्सा बन जाए। लेकिन आज से पचास साल पहले आई फिल्म ऐसा कर गई कि पांच दशक बाद भी वो फिल्म हमारी जिंदगी का हिस्सा है। फिल्म का एक-एक सीन और एक-एक डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर बना हुआ है। आप समझ ही गए होंगे कि हम बात कर रहे हैं भारतीय सिनेमा की सबसे यादगार, कल्ट-क्लासिक फिल्म ‘शोले’ की।
15 अगस्त 1975 को रिलीज हुई ‘शोले’ को आज 50 साल पूरे हो गए हैं। लेकिन अभी भी अगर ये फिल्म टीवी पर आती दिख जाए तो फिर गब्बर सिंह का अंत करने से पहले आगे बढ़ने का सवाल ही नहीं उठता है। फिल्म की लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हर किसी के ऑफिस में ‘हरीराम नाई’ का एक किरदार होना आम बात हो गई है।
‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई’ से लेकर ‘कितने आदमी थे’ जैसे फिल्म के कई डायलॉग आज भी लोगों की जुबान पर जस के तस बने हुए हैं। फिल्म की गोल्डन जुबली के मौके पर जानते हैं ‘शोले’ की मेकिंग से जुड़े किस्से और कैसे बनकर तैयार हुई भारतीय सिनेमा की ये ऐतिहासिक फिल्म।

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फिल्म 'शोले' में बने ठाकुर बलदेव - फोटो : एक्स (ट्विटर)

संजीव कुमार नहीं थे ठाकुर के लिए पहली पसंद
आज ‘शोले’ का एक-एक किरदार आइकॉनिक है और उन किरदारों को निभाने वाले कलाकारों को देखकर ऐसा लगता है जैसे ये किरदार इन्हीं के लिए बने हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि फिल्म की कास्टिंग में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। फिल्म में ठाकुर का किरदार जिसे संजीव कुमार ने निभाया है। वो दरअसल पहले दिलीप कुमार को ऑफर हुआ था। लेकिन दिलीप साहब ने इस किरदार को ठुकरा दिया था। जिसके बाद संजीव कुमार ने इसे निभाया। 

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अमजद खान - फोटो : सोशल मीडिया

ऐसे आया गब्बर सिंह के किरदार का आइडिया
गब्बर सिंह के किरदार को अगर शोले की आत्मा कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगा। लेकिन क्या आपको पता है कि गब्बर सिंह के किरदार का आइडिया कहां से आया है? दरअसल, फिल्म के लेखक सलीम खान के पिता पुलिस में थे। उन्होंने गब्बर नाम के एक डाकू की कहानी उन्हें सुनाई थी, जो कुत्ते पालता था और पुलिस की नाक काट देता था। यहीं से सलीम खान को गब्बर सिंह के किरदार का आइडिया आया।

…तो अमजद खान नहीं, डैनी होते गब्बर सिंह
गब्बर सिंह के किरदार को जिन अमजद खान ने यादगार बना दिया, असल में उस किरदार के लिए अमजद खान मेकर्स की पहली पसंद भी नहीं थे। इस रोल के लिए पहले डैनी डेंजोंगप्पा को अप्रोच किया गया था। लेकिन वो ‘धर्मात्मा’ फिल्म के लिए पहले ही फिरोज खान से वादा कर चुके थे। इसलिए उन्हें गब्बर सिंह के रोल के लिए मना करना पड़ा। इसके बाद ये किरदार अमजद खान को मिला।

यह खबर भी पढ़ेंः 50 Years of Sholay: इस एक्टर को 'शोले' में काम करने पर फीस में मिला था फ्रिज, जानिए फिल्म के दिलचस्प किस्से

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शोले - फोटो : इंस्टाग्राम@filmheritagefoundation

अमिताभ बच्चन नहीं, ये एक्टर था जय के लिए पहली पसंद
फिल्म में अमिताभ बच्चन ने जय का किरदार निभाया है, जिसे काफी पसंद किया गया। लेकिन इस किरदार के लिए मेकर्स पहले शत्रुघ्न सिन्हा को लेना चाहते थे। लेकिन बाद में सलीम खान ने जय के किरदार के लिए अमिताभ बच्चन का नाम सुझाया।

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शोले - फोटो : इंस्टाग्राम@filmheritagefoundation

कुछ और थी फिल्म की मूल कहानी, बाद में हुआ बदलाव
फिल्म में संजीव कुमार द्वारा निभाया गए ठाकुर बलदेव सिंह के किरदार का नाम असल में सलीम खान के ससुर का नाम था। यही नहीं सलीम-जावेद ने जब फिल्म की कहानी लिखी थी तो ये मूल कहानी एक रिटायर्ड सेना अधिकारी के बारे में थी। लेकिन बाद में इस किरदार को एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी में बदल दिया गया, जो बदला लेने के लिए दो अपराधियों को काम पर रखता है। इस फिल्म के लिए सलीम-जावेद को 10 हजार रुपये की फीस मिली थी, जो उस वक्त काफी ज्यादा थी।

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संजीव कुमार और अमजद खान - फोटो : सोशल मीडिया

फिल्म में गब्बर सिंह के हैं सिर्फ 9 सीन
‘शोले’ में अगर सबसे ज्यादा कोई किरदार हिट हुआ है तो वो गब्बर सिंह का किरदार है। जिसका एक-एक डायलॉग हिट है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरी फिल्म में गब्बर सिंह के सिर्फ 9 ही सीन हैं।

यह खबर भी पढ़ेंः क्या आप जानते हैं फिल्म 'शोले' से जुड़े इन सवालों का जवाब?

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संजीव कुमार, धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया

ठाकुर का किरदार करना चाहते थे धर्मेंद्र, संजीव कुमार बनना चाहते थे वीरू
फिल्म में ठाकुर और वीरू दोनों के किरदार काफी लोकप्रिय हैं और दोनों किरदारों में संजीव कुमार और धर्मेंद्र ने अच्छा काम किया है। लेकिन क्या आपको पता है कि ये दोनों ही अपना-अपना किरदार करना ही नहीं चाहते थे। दरअसल, धर्मेंद्र चाहते थे कि वो ठाकुर का किरदार करें, क्योंकि उनका मानना था कि फिल्म की कहानी ठाकुर और गब्बर के बीच दुश्मनी की है।
जबकि संजीव कुमार वीरू का किरदार निभाना चाहते थे। क्योंकि संजीव कुमार हेमा मालिनी से प्यार करते थे और वो चाहते थे कि वो बसंती बनी हेमा के साथ ज्यादा से ज्यादा सीन कर सकें और वक्त गुजार सकें। लेकिन बाद में किसी तरह निर्देशक रमेश सिप्पी ने दोनों को समझाया और उन्हें उनके किरदारों के लिए राजी किया।

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जया बच्चन और अमिताभ बच्चन - फोटो : सोशल मीडिया

एक सीन को शूट करने में लगे थे 20 दिन
फिल्म का एक सीन काफी पसंद किया गया जिसमें जया भादुड़ी का किरदार राधा लैम्प बुझाती है और अमिताभ बच्चन का जय का किरदार माउथ ऑर्गन बजाता है। देखने में सामान्य से लगते इस सीन को शूट करने में 20 दिन लग गए थे। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि रमेश शिप्पी और सिनेमैटोग्राफर द्वारका दिवेचा सीन में सूरज डूबने और रात के बीच के कुछ मिनट को फिल्म में दिखाना चाहते थे। लेकिन बार-बार ये मिनट गुजर जाते थे। अंत में इसी टाइम में सीन को फाइनल किया गया।

यह खबर भी पढ़ेंः ‘शोले’ की स्टार कास्ट, क्या आपको अब भी याद हैं ये चर्चित किरदार?

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फिल्म शोले - फोटो : सोशल मीडिया

सेंसर बोर्ड ने इस वजह से बदल दिया था फिल्म का क्लाइमैक्स
आज के वक्त में ‘एनिमल’ जैसी फिल्मों में हद से ज्यादा वॉयलेंस दिखाई जाती है। लेकिन 1975 में ‘शोले’ के क्लाइमैक्स को सेंसर बोर्ड ने ये कहते हुए बदलवा दिया था कि ये अधिक हिंसक है। पहले फिल्म के क्लाइमैक्स में ठाकुर गब्बर को कील वाली चप्पलों से मार-मारकर मार डालता था। लेकिन सेंसर बोर्ड के कहने के बाद रमेश सिप्पी ने क्लाइमेक्स बदला, जिसमें पुलिस गब्बर को गिरफ्तार करती है।

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शोले फिल्म की कास्ट - फोटो : सोशल मीडिया
उस वक्त की महंगी फिल्मों में से एक थी ‘शोले’
‘शोले’ उस वक्त की सबसे महंगी फिल्मों में से थी। पहले फिल्म के 1 करोड़ रुपए के बजट में बनने का अनुमान था। लेकिन बाद में फिल्म का बजट 3 करोड़ रुपए तक पहुंच गया था, जो उस वक्त के लिए काफी ज्यादा था।
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शोले - फोटो : सोशल मीडिया
ढाई साल चली थी ‘शोले’ की शूटिंग
‘शोले’ की शूटिंग में ढाई साल का वक्त लगा था। क्योंकि फिल्म में दिखाए गए रामगढ़ का सेट बेंगलोर के पास बनाया गया था। यहां बारिश, लाइट और तकनीकी समस्याओं के चलते शूटिंग कई बार टल जाती थी। जिस वजह से फिल्म की शूटिंग में वक्त लगा।

शुरू में नहीं चली थी फिल्म, क्रिटिक्स से भी मिले थे मिले-जुले रिव्यू
आज भारतीय सिनेमा की सबसे सफल और यादगार फिल्मों में गिनी जाने वाली ‘शोले’ अपनी रिलीज के बाद शुरुआती दिनों में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। जिसके बाद ऐसा लगा था कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी, क्योंकि क्रिटिक्स से भी फिल्म को कोई खास रिव्यू नहीं मिले थे। लेकिन बाद में ‘शोले’ ने ऐसी रफ्तार पकड़ी कि फिल्म पांच साल तक थिएटर्स में चलती रही और ब्लॉकबस्टर बन गई।
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