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ये हैं दुनिया के सबसे क्रूर तानाशाह, कोई था नरभक्षी, कोई चीखें सुन-सुनकर खाता था खाना

Wed, 18 Dec 2019 10:41 AM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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दुनिया के क्रूर तानाशान
इस्लामाबाद की विशेष अदालत ने मंगलवार को पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह परवेज मुशर्रफ को राजद्रोह का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। ऐसे में मुशर्रफ और तानाशाह दोनों पर ही चर्चा होनी जरूरी है। आज भी दुनिया के ऐसे देश हैं, जहां तानाशाही बरकरार है। इतिहास गवाह है जब-जब दुनिया में कहीं भी तानाशाही हुई, वहां हजारों-लाखों बेगुनाहों और मासूमों का खून बहाया गया है। कई बार तो सत्ता के नशे में चूर इन तानाशाहों ने हैवानियत की सारी हदें पार कर दीं।


आज हम आपको बता रहे हैं दुनिया के ऐसे ही क्रूर तानाशाहों के बारे में, जिन्होंने लंबे समय तक जनता को अपनी सनक का शिकार बनाया। इनमें से एक तो ऐसा रहा, जो चीखें सुने बिना खाना तक नहीं खाता था। आगे की स्लाइड्स देखें।
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मुअम्मर गद्दाफी

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  • गद्दाफी का जन्म लीबिया के सिरते शहर में एक खानाबदोश बद्दू कबीले में हुआ था। 
  • गद्दाफी का उदय साल 1967 के अरब-इस्राइल युद्ध में अरब की हार से शुरू हुई राष्ट्रवाद की लहर से हुआ था। इस हार के लिए वहां के शासक इदरिस को जिम्मेदार ठहराया गया। गद्दाफी ने लीबिया पर 42 साल राज किया।
  • एक बार अमेरिकी खुफिया एजेंसी द्वारा गद्दाफी का तख्ता पलटने की कोशिश की गई थी। इसके बाद उसने धार्मिक समर्थन के लिए अंग्रेजी कैलेंडर के महीनों के नाम तक बदल दिए। 
  • लीबिया की अर्थिक स्थिति को देखते हुए गद्दाफी ने तेलशोधक कंपनियों के नया करार करने या लीबिया छोड़ने की चेतावनी दे दी। इसके बाद सभी अरब देशों ने लद्दाफी का फॉर्मूला अपनाया। इससे लीबिया की अर्थव्यवस्था में भारी उछाल आया था।
  • गद्दाफी अपनी महिला गार्ड्स और बुलेट प्रूफ गाड़ियों के लिए हमेशा चर्चा में रहता था। अक्तूबर 2011 में एक सैन्य हमले में गद्दाफी मारा गया था। 
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होस्नी मुबारक 

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  • मुहम्मद होस्नी सईद इब्राहीम मुबारक अरब गणराज्य मिस्त्र के चौथे राष्ट्रपति थे।
  • होस्नी मुबारक ने 1981 से 2011 तक मिस्र पर राज किया। होस्नी की क्रूरता की वजह से सभी लोग उनके विरोधी हो गए। एक बार इस्लामी चरमपंथियों ने हुस्नी मुबारक पर जानलेवा हमला किया लेकिन वह वहां से बच निकला था। 
  • लेकिन वह आखिरी बार नहीं था। इसके बाद भी तकरीबन 6 बार हुस्नी मुबारक पर हमला हुआ।
  • साल 2011 में जनता ने होस्नी के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। आखिरकार वह सत्ता से बाहर हो गया। साल 2012 में होस्नी को उम्र कैद की सजा सुनाई गई थी।

ईदी अमीन

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  • युगांडा के शासक ईदी अमीन ने साल 1971 में सत्ता हथियाई। इसके बाद उसने 8 साल देश पर राज किया।
  • अमीन के राज में करीब छह लाख लोगों की हत्या की गई थी। अमीन को यह सनक थी की किसी भी काम के लिए उससे बेहतर और बड़ा कोई नहीं हो सकता।
  • सजा के तौर पर ईदी लोगों के निजी अंग और हाथ पैर काटवा दिया करता था।
  • ऐसा भी कहा जाता है कि ईदी अपने विरोधियों को उन्हीं का मांस खाने पर भी मजबूर कर देता था। खुद भी इंसान का मांस खाता था।
  • ईदी ने अपने शासनकाल में लोगों के सर हथौड़े से फोड़ देने के भी आदेश दिए थे।
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किम जोंग उन

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  • किम जोंग उन,  किम जोंग इल के बेटे और किम सुंग के पोते हैं। किम जोंग इल ने साल 1994 से 2011 तक उत्तर कोरिया पर राज किया था। जबकि किम सुंग ने 1948 से 1994 तक उत्तर कोरिया की सत्ता संभाली थी।
  • ऐसा कहा जाता है कि किम ने स्विट्जरलैंड के एक स्कूल से पढ़ाई की है।
  • किम ने जेलों और कैम्पों में इतना जुल्म फैलाया हुआ है कि जो लोग भागने की कोशिश करते हैं उन्हें बिना कुछ सोचे समझे गोली मार दी जाती है।
  • किम को सनकी कहा जाता है, क्योंकि वह कानून या किसी भी चीज की परवाह नहीं करता। जो उसके मन में आता है वो वही करता है।
  • एक महिला जो उत्तर कोरिया से भाग कर आई थी, उसने बताया कि 'जेलों में पुरुष सुरक्षा गार्ड महिला कैदियों के साथ दुष्कर्म करते हैं। उसने अपनी आंखों के सामने हजारों कैदियों के साथ दुष्कर्म और उनकी हत्या होते देखा है। इतना ही नहीं उन्हें जिंदा जला दिया जाता है।
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सद्दाम हुसैन 

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  • सद्दाम हुसैन का जन्म 28 अप्रैल 1937 को बगदाद के उत्तर में स्थित तिकरित के पास अल-ओजा गांव में हुआ।
  • साल 1957 में 20 साल के सद्दाम ने बाथ पार्टी की सदस्यता ली। पार्टी में सद्दाम ने सुन्नियों के बीच खुद को स्थापित किया और पीछे-पीछे एक समूह तैयार कर लिया। 16 जुलाई 1979 को अल बकर को सत्ता से हटाकर वो खुद इराकी गद्दी पर बैठ गया। 
  • सद्दाम हुसैन पर हजारों कुर्द, शिया और तुर्की के मुसलमानों की मौत का इल्जाम है। एक अंदाजे के मुताबिक सद्दाम हुसैन के शासनकाल में करीब 20 लाख लोगों की हत्या करवाई गई थी। सद्दाम ने करीब एक लाख कुर्दिश पुरुष, महिलाओं और बच्चों को रसायनों के जरिए मौत के घाट उतरवा दिया था।
  • ऐसा दावा भी किया जाता है कि सद्दाम मरने वाले लोगों की चीखें रिकॉर्ड कर उसे रात को खाना खाते समय सुनकर बहुत हंसा करता था।
  • 5 नवंबर 2006 को सद्दाम हुसैन को मौत की सजा सुनाई गई। इसके बाद उसे उत्तरी बगदाद के खदीमिया इलाके के कैंप जस्टिस में फांसी दे दी गई थी। 
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