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नए इंजीनियरिंग कॉलेजों पर क्यों लगी रोक, कहां खाली हैं सबसे ज्यादा सीटें, जानें सबकुछ

Tue, 25 Feb 2020 12:14 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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File Photo
अखिल भारतीय तकनीकि शिक्षा परिषद् (AICTE - All India Council for Technical Education) ने देश में नए इंजीनियरिंग कॉलेजों पर अगले दो साल के लिए रोक लगा दी है। यानी 2022 तक देश में कोई भी नया इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं खुल सकेगा। एआईसीटीई इसके लिए आवेदन स्वीकार ही नहीं करेगा। इसकी घोषणा एआईसीटीई ने कुछ दिनों पहले ही की है।

अब सवाल है कि परिषद् ने ऐसा फैसला क्यों लिया है? किन कारणों से कॉलेजों पर रोक लगाई गई है? इस संबंध में पूरी जानकारी आगे दी जा रही है। 
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AICTE - फोटो : Social media
प्रतिबंध की घोषणा करते हुए एआईसीटीई ने अपने हैंडबुक में लिखा है कि ' पिछले कुछ सालों में विभिन्न इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में बड़ी संख्या में खाली सीटें और भविष्य में इन पाठ्यक्रमों की मांग को देखते हुए, परिषद् ने फैसला किया है कि किसी नए तकनीकी संस्थान को इंजीनियरिंग व टेक्नोलॉजी में डिप्लोमा / अंडरग्रेजुएट / पोस्टग्रेजुएट स्तर के लिए अनुमति नहीं मिलेगी। प्रतिबंध के फैसले की दो साल बाद फिर से समीक्षा की जाएगी।'
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File Photo

50 फीसदी सीटें खाली

  • AICTE ने ये फैसला खासतौर पर शैक्षणिक सत्र 2019-20 के अनुभव के आधार पर लिया है। इस सत्र में देखा गया है कि देशभर के विभिन्न इंजीनियरिंग संस्थानों में करीब 50 फीसदी सीटें खाली रह गई थीं।
  • एआईसीटीई की रिपोर्ट के अनुसार, अगर सीटों की संख्या के अनुपात में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या देखी जाए, तो यह सिर्फ 49.8 फीसदी थी।

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किस राज्य में सबसे ज्यादा खाली सीटें

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2018 के बीच तीन सालों में 518 इंजीनियरिंग संस्थानों पर ताले लग चुके हैं।
  • देश में सबसे ज्यादा इंजीनियरिंग कॉलेजों में खाली सीटों की संख्या तमिलनाडु में है। दूसरे स्थान पर आंध्र प्रदेश और तीसरे पर महाराष्ट्र है।
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aicte

क्यों खाली हैं इंजीनियरिंग की सीटें

  • AICTE के आंकड़ों के अनुसार, 2019 में सिर्फ छह लाख इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स को कैंपस प्लेसमेंट मिल पाई थी।
  • दूसरा बड़ा कारण है निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में शिक्षण की खराब गुणवत्ता, जरूरी सुविधाओं की कमी और अंत में मोटी रकम भरने के बाद उचित नौकरी न मिल पाना।
  • एआईसीटीई की रिपोर्ट के अनुसार, कई इंजीनियरिंग संस्थानों में उन छात्रों को भी दाखिला मिल रहा है जिन्हें इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में शून्य अंक मिला। इसके बावजूद सीटें खाली रह जा रही हैं। ऐसे में सीटों की संख्या बढ़ाना पैसों की बर्बादी है। ऐसे हालात में नए संस्थानों में निवेश करना समझदारी नहीं होगी।
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