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क्या है रेपो रेट और इससे आपको क्या फायदा, जानें RBI मॉनेटरी पॉलिसी की जरूरी बातें

Thu, 06 Jun 2019 07:46 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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RBI
रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने गुरुवार को ब्याज दरों की घोषणा की। रेपो रेट में 0.25% की कटौती की गई है। इसे 6% से घटाकर 5.75% कर दिया है। यह 9 साल में सबसे कम है। 

आपने आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी के दौरान रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट और सीआरआर जैसे शब्द जरूर सुने होंगे। पर क्या आप इन शब्दों के मतलब जानते हैं? आज हम आपको मॉनेटरी पॉलिसी से जुड़ी जरूरी बातें और इन शब्दों का मतलब और मायने बता रहे हैं...
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रेपो रेट
रेपो रेट वह दर होती है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज, जैसे होम लोन, कार लोग अब सस्ते हो जाएंगे। हालांकि बैंक इसे कब तक और कितना कम करेंगे ये उन पर निर्भर करता है। इसे भारतीय रिजर्व बैंक हर तिमाही के आधार पर तय करता है।
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रिवर्स रेपो रेट

यह रेपो रेट से उलट होता है। यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा राशि पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजार में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है। बाजार में जब भी बहुत ज्यादा नकदी दिखाई देती है, आरबीआई रिवर्स रेपो रेट बढ़ा देता है, ताकि बैंक ज्यादा ब्याज कमाने के लिए अपनी रकम उसके पास जमा करा दें।

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rbi
सीआरआर
देश में लागू बैंकिंग नियमों के तहत हर बैंक को अपनी कुल नकदी का एक निश्चित हिस्सा रिजर्व बैंक के पास रखना होता है। इसे ही कैश रिजर्व रेशियो (CRR) या नकद आरक्षित अनुपात कहते हैं।

एसएलआर
जिस दर पर बैंक अपना पैसा सरकार के पास रखते हैं, उसे SLR कहते हैं। नकदी की तरलता को नियंत्रित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है। कॉमर्शियल बैंकों को एक खास रकम जमा करानी होती है जिसका इस्तेमाल किसी इमरजेंसी लेन-देन को पूरा करने में किया जाता है।
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shaktikant das - फोटो : ANI
एमएसएफ
आरबीआई ने पहली बार वित्त वर्ष 2011-12 में वार्षिक आर्थिक नीति समीक्षा में MSF का जिक्र किया था। यह 9 मई 2011 को लागू हुआ। इसमें सभी शेड्यूल कॉमर्शियल बैंक एक रात के लिए अपने कुल जमा का 1% तक लोन ले सकते हैं।

बता दें कि शक्तिकांत दास के आरबीआई के गवर्नर बनने के बाद यह लगातार तीसरी कटौती है। इससे पहले फरवरी और अप्रैल की पॉलिसी में भी RBI ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की थी। अब तक तीन पॉलिसी में 0.75 फीसदी की कटौती की जा चुकी है।
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भारतीय रिजर्व बैंक
आउटलुक न्यूट्रल से अकोमोडेटिव किया

RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने मौद्रिक नीति को लेकर नजरिया न्यूट्रल से बदलकर अकोमोडेटिव (उदार) कर दिया है। यानी रेपो रेट में फिलहाल इजाफा नहीं किया जाएगा। RBI गवर्नर ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह भी नहीं है कि अब ब्याज दरों में कटौती नहीं की जाएगी। MPC की अगली बैठक अगस्त में होगी। 7 ोअगस्त को मौद्रिक नीति की घोषणा की जाएगी।
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