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वो भारतीय गणितज्ञ जिसने आइंस्टीन को दी थी चुनौती, नासा के कंप्यूटर से तेज थी कैलकुलेशन

Thu, 14 Nov 2019 12:49 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • देश के महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 की उम्र में निधन
  • आइंस्टीन की थ्योरी को दी थी चुनौती
  • नासा में कंप्यूटर से भी तेज किया था कैलकुलेशन
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : BBC
देश के प्रसिद्ध व महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का 74 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। बताया जा रहा है कि वे पिछले कई वर्षों से बीमार चल रहे थे। बिहार के पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH) में उनका इलाज चल रहा था।

लेकिन वशिष्ठ नारायण सिंह की कहानी यहीं खत्म नहीं हो जाएगी। देश-दुनिया में उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। इसका कारण है उनका गणित का ज्ञान। उन्होंने दुनिया के महान वैज्ञानिक आइंस्टीन को भी चुनौती दे डाली थी। उनके बारे में आगे पढ़ें...
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : social media
वशिष्ठ नारायण सिंह... युवावस्था में वह 'वैज्ञानिक जी' के नाम से मशहूर थे। करीब 40 साल से वह मानसिक बीमारी सिजोफ्रेनिया से पीड़ित थे। बिहार के पटना स्थित एक अपार्टमेंट में गुमनामी का जीवन बिता रहे थे। किताबें, कॉपियां और पेंसिल ही उनके सबसे अच्छे दोस्त रहे। 
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
पटना साइंस कॉलेज से पढ़ने वाले वशिष्ठ नारायण सिंह गणित में कुछ गलत पढ़ाने पर अपने शिक्षक को भी टोक देते थे। इस बात का पता जब कॉलेज प्राचार्य को चला था तो उन्होंने उनकी अलग से परीक्षा ली थी। इसमें वशिष्ठ नारायण सिंह ने सभी अकादमिक रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
  • पटना साइंस कॉलेज में पढ़ने के दौरान ही वशिष्ठ नारायण कैलिफोर्निया विवि के प्रो. जॉन कैली की नजरों में आए। कैली वशिष्ठ की प्रतिभा पहचान गए और फिर 1965 में वशिष्ठ नारायण अमेरिका चले गए।
  • 1969 में उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से पीएचडी की और फिर वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर बने।
  • उन्होंने नासा (NASA) में भी काम किया। लेकिन मन न लगने पर 1971 में वापस भारत लौट आए।
  • यहां आईआईटी कानपुर, आईआईटी बॉम्बे और आईएसआई कोलकाता में नौकरी की। 
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Albert Einstein
  • वशिष्ठ नारायण सिंह ने आइंस्टीन के सापेक्ष सिद्धांत को चुनौती दी थी।
  • उनके बारे में एक और कहानी बड़ी मशहूर है। जब नासा अपोलो की लॉन्चिंग कर रहा था, तब वशिष्ठ नारायण भी वहां मौजूद थे। लॉन्चिंग से ठीक पहले 31 कंप्यूटर कुछ समय के लिए बंद हो गए थे। इस बीच वशिष्ठ नारायण ने अपना कैलकुलेशन जारी रखा। जब कंप्यूटर ठीक हुए, तो वशिष्ठ और कंप्यूटर्स का कैलकुलेशन एक जैसा ही था।
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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
वशिष्ठ नारायण सिंह के भाई अयोध्या सिंह ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि 'भैया अमेरिका से अपने साथ 10 बक्से लाए थे, जिनमें किताबें थीं। उन किताबों को वह हमेशा पढ़ते रहते। जैसे किसी छोटे बच्चे को जरूरत होती है, भैया के लिए भी हर तीन-चार दिनों में एक बार कॉपी, पेंसिल लानी पड़ती। वह पेंसिल लेकर फ्लैट की दीवारों, रेलिंग पर भी लिखना, गणित हल करना शुरू कर देते।'

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वशिष्ठ नारायण सिंह (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
वशिष्ठ नारायण के असामान्य व्यवहार के कारण उनकी पत्नी ने भी उन्हें छोड़ दिया था। वशिष्ठ नारायण ने कभी अपने घरवालों को बताया था कि कुछ सहयोगियों ने उनके शोध को अपने नाम से छपवा लिया था। ऐसी कई बातें उन्हें हमेशा परेशान करती थीं।

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