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चाय-शरबत बेचने वाले अजय दे रहे NEET की फ्री कोचिंग, ऋतिक रोशन ने यूं की तारीफ

Mon, 16 Sep 2019 05:22 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

  • कभी चाय बेचते थे अजय, आज बच्चों को दे रहे नीट की फ्री कोचिंग
  • अजय के जिंदगी फाउंडेशन की एक्टर ऋतिक रोशन ने की तारीफ
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अजय बहादुर सिंह अपने स्टूडेंट्स के साथ - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
कहते हैं किसी भी नई शुरुआत के लिए कभी देर नहीं होती। और कोशिशें कभी न कभी कामयाबी की बुलंदियों तक जरूर पहुंचाती हैं। ये बात अजय बहादुर सिंह पर बिल्कुल सटीक बैठती है। शायद आप इन्हें अब तक नहीं जानते हों। तो हम आपको इनके बारे में बता रहे हैं। क्योंकि इनकी कहानी हर किसी को आशावादी बना सकती है। अब तो बॉलीवुड एक्टर ऋतिक रोशन ने भी सोशल मीडिया पर इनकी तारीफ की है। आगे की स्लाइड्स में जानें अजय की कहानी और देखें तस्वीरें। 
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अजय बहादुर सिंह - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
झारखंड के देवघर में 1972 में जन्मे अजय बहादुर सिंह का सपना डॉक्टर बनने का था। 1990 में वह पटना (बिहार) में रहकर जब एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे, तब उन्हें अपने पिता की किडनी की बीमारी का पता चला। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए उनके परिवार को पूरी संपत्ति बेचनी पड़ गई। इसके अलावा दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मदद ली और पिता का इलाज कराया।
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एक अवॉर्ड पाते अजय बहादुर सिंह - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
घर के बड़े बेटे होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी भी अजय पर आ गई। उन्होंने अपनी पढ़ाई और पिता के ईलाज के खर्चों के लिए ट्यूशन देना शुरू किया। जब इससे भी काम नहीं चला, तो उन्होंने देवघर के श्रावणी मेले में चाय और शरबत का स्टॉल लगाया।

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अजय बहादुर सिंह और उनके स्टूडेंट्स सुपर 30 के आनंद कुमार के साथ - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
मार्केटिंग का थोड़ा अनुभव लेने के बाद अजय ने घर-घर जाकर सोडा बनाने वाली मशीन बेचने का काम शुरू किया। अब तक अजय किसी तरह अपनी पढ़ाई और पिता का ईलाज दोनों जारी रख पा रहे थे। लेकिन ईलाज के लिए बार-बार चेन्नई आने-जाने का खर्च नहीं जुट पा रहा था। इस कारण अजय को अपनी मेडिकल की तैयारी बीच में ही छोड़नी पड़ी। हालांकि उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की।
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सुपर 30 के आनंदर कुमार और उनके भाई के साथ अजय बहादुर सिंह - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
अपनी पढ़ाई छोड़ने के बाद अजय ने खाली हाथ बैठ कर अपनी किस्मत को नहीं कोसा। बल्कि लगातार ट्यूशन देना जारी रखा। 1996 में पटना में एक कमरे में कोचिंग चलाकर बैंकिंग, रेलवे, एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में उम्मीदवारों की मदद की। एक साल में ही यह कोचिंग काफी अच्छा चला और अजय की आर्थिक स्थिति सुधरने लगी।
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'जिंदगी' के स्टूडेंट्स के साथ सुपर 30 के आनंद कुमार - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
2007 में उन्होंने अपने जीवन का सबसे अहम फैसला लिया और Adyant नाम से एक प्लस टू साइंस कॉलेज खोला। इस दौरान अजय ने देखा कि कई होनहार बच्चे पैसों की कमी के कारण कॉलेज में दाखिला नहीं ले पा रहे थे। तब उन्हें अपना समय याद आया, जब पैसों की कमी के कारण उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। अजय बताते हैं कि तभी उन्होंने गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का फैसला लिया।
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वेंकैया नायडू, ऋतिक, आनंद कुमार व अन्य लोगों के साथ सुपर 30 की स्क्रीनिंग पर अजय बहादुर सिंह - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
अजय के अनुसार, 'अपने बचपन के दोस्त आनंद कुमार के सुपर 30 को देखकर मैंने भी एनजीओ 'जिंदगी की शुरुआत की। इसके तहत गरीब बच्चों को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की फ्री कोचिंग देता हूं। उनका रहना और खाना भी फ्री होता है। अजय की यह संस्था ओडिशा के भुवनेश्वर में है।'

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सीएम नवीन पटनायक के साथ अजय और उनके स्टूडेंट्स - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
फिलहाल जिंदगी में 19 बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। पिछले बैच के 14 बच्चों ने नीट में सफलता पाई थी, जिनमें से 12 ने अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लिया। मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी इन बच्चों को सम्मानित किया था। अजय विद्यार्थियों से गुरु दक्षिणा भी लेते हैं। गुरु दक्षिणा के रूप में वे स्टूडेंट्स को ये शपथ दिलाते हैं कि डॉक्टर बनने के बाद वे कभी गरीब मरीजों को वापस नहीं लौटाएंगे। 

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अजय बहादुर सिंहृ - फोटो : Facebook - Ajay Bahadur Singh
अब एक्टर ऋतिक रोशन ने सोशल मीडिया पर लिखा है - 'क्या बेहतरीन पहल की है। इसके लिए आपको सलाम है अजय बहादुर सिंह।'

जब अजय से पूछा गया कि उन्होंने संस्था का नाम जिंदगी ही क्यों रखा? अजय ने जवाब दिया - 'जिंदगी जीतना सभी चाहते हैं, पर किसी और की जिंदगी जीतना सबके बस की बात नहीं है।' 

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