बेहद गरीब परिवार में पैदा हुए मधुसूदन राव के माता-पिता 18 घंटे मजदूरी करते थे। इसके बाद भी वो परिवार को भरपेट खाना नहीं खिला पाते थे। आज मधुसूदन राव 20 कंपनियां चला रहे हैं। वो MMR ग्रुप के फाउंडर हैं। मधुसूदन का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव में हुआ था।
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बंधुआ मजदूर के बेटे को किसी ने नहीं दी थी नौकरी, खोल दी खुद की 20 कंपनियां
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उनका पूरा नाम मन्नम मधूसूदन राव है। वे पिछड़ी जाति के हैं। जब वे थोड़े बड़े हुए तो उन्हें घर की हालत देखकर रोना आता था। उनके माता-पिता को काम न मिलने और गरीबी का एक कारण उनका पिछड़ी जाति का होना भी था। उनकी पिता एक जमींदार के पास बंधुआ मजदूरी करते थे।
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मधुसूदन की मां एक तंबाकू फैक्ट्री में काम करती थीं। घर चलाने के लिए बड़ी बहन भी मां के साथ काम करने जाती थीं। गांव में नियम था कि पिछड़ी जाति के लोग घुटनों से नीचे तक धोती नहीं पहनेंगे। इसी से उनकी पहचान होती थी। ऐसे माहौल में माता-पिता के लिए बच्चों को पढ़ाना बहुत मुश्किल था।
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परिवार की हालत सुधारने के लिए मधुसूदन ने पढ़ाई पर पूरा ध्यान दिया। मधु पढ़ाई में काफी होशियार थे। इसलिए टीचर्स उन पर खास ध्यान देते थे। वे हमेशा एग्जाम में अच्छे नंबर लाते। उन्होंने 10वीं और12वीं की परीक्षा पास की। 12वीं के बाद एंट्रेंस एग्जाम पास कर पॉलिटेक्निक कॉलेज में दाखिला लिया। उनके पॉलिटेक्निक डिप्लोमा करने के पीछे मंशा थी कि उन्हें जल्द से जल्द सरकारी नौकरी मिल जाए। लेकिन अफसोस उनकी नौकरी नहीं लगी।
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उन्हें पिछड़ी जाति और घर की हालत का हवाला देकर कोई नौकरी नहीं देता था। काफी समय तक नौकरी नहीं मिली तो वे बहुत निराश हो गए। आखिर में वे भी भाई के साथ मजदूरी करने लगे। इसके साथ ही वे चौकीदारी का भी काम किया करते थे। ओवरटाइम करके वे घर वालों का खर्चा उठाते
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मधुसूदन को लगने लगा था कि छोटी-मोटी नौकरी से घर की हालत नहीं सुधर सकती। तब उन्होंने बिजनेस करने की सोची। एक बार तो जिन लोगों के साथ उन्होंने कंपनी शुरू की वो सारा पैसा लेकर फरार हो गए। फिर भी मधुसूदन ने हार नहीं मानी।उन्होंने फिर से दूसरे लोगों के साथ काम शुरू किया।
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अलग-अलग लोगों के साथ काम करने की वजह से वे इस बात को समझ चुके थे कि कुछ लोगों पर ही विश्वास किया जाना चाहिए। धीरे-धीरे वे कामयाबी की सीढ़ी चढ़े और MMR ग्रुप बना लिया। इस ग्रुप में आज टेलिकॉम, आईटी, इलेक्ट्रिकल, मेकैनिकल, फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में 20 कंपनियां हैं। वे आज भी दिन भर में 18 घंटे तक काम करते है।