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चेन्नई की ये लड़की 39 साल की उम्र में बनी जनरल मोटर्स की हेड, खुद ही खोले सफलता के राज

Sun, 17 Jun 2018 11:59 AM IST
दिव्या सूर्यदेवरा
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Dhivya Suryadevara
मेरी बेटी का मुझसे अच्छा खासा लगाव है। वह अक्सर इंटरनेट पर मेरे नाम से जुड़ी खबरें ढूंढकर एक विजयी भाव लिए मुझे उसकी जानकारी देती है। यदि आप उससे पूछेंगे कि वह भविष्य में क्या करना चाहेगी, तो उसका जवाब मेरा ही काम होगा। उनतालीस वर्ष पहले मेरा जन्म चेन्नई में हुआ और मेरा अधिकांश बचपन भी यहीं बीता। मैं बहुत छोटी थी, जब मेरे पिता गुजर गए। मेरी मां ने ही मुझे और मेरी दोनों बहनों को पाल-पोस कर बड़ा किया। वैसे तो उन्होंने हमारी परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन यह शिक्षा भी दी कि कुछ भी आसानी से हासिल नहीं होता। मैंने भी उनकी मेहनत की हमेशा कद्र की। चेन्नई से ही कॉमर्स में स्नातक करने के बाद मैं किसी अग्रणी बिजनेस संस्थान से एमबीए करना चाहती थी। मेरी यही चाहत मुझे अमेरिका में हार्वर्ड ले गई।
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Dhivya Suryadevara
आसान नहीं रही अमेरिका में पढ़ाई
पढ़ाई के सिलसिले में जाने से पहले मैं कभी अमेरिका नहीं आई थी। बाईस साल की उम्र में घर से इतनी दूर आना, फिर एक बिल्कुल अलग संस्कृति से वास्ता पड़ना, मेरे लिए यह सब आसान नहीं रहा। उस वक्त हार्वर्ड में आने वाला हर शख्स काम करने का थोड़ा-बहुत अनुभव अपने साथ लेकर आया था और मैं सीधे कॉलेज से यहां पहुंची थी। मेरे पास बहुत ज्यादा पैसे भी नहीं होते थे। मेरे कई दोस्त अक्सर घूमने जाया करते थे। मेरे लिए यह दूर की कौड़ी थी, क्योंकि मुझ पर हर वक्त कर्ज का भार रहता था। मेरी हर चीज स्टुडेंट लोन से जुड़ी थी, जिसकी कीमत मुझे वापस करनी थी। ऐसी परिस्थिति में मेरे लिए यह जरूरी हो गया था कि मैं पढ़ाई के तुरंत बाद कोई जॉब ढूंढती।
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Dhivya Suryadevara
दिलचस्प है जनरल मोटर्स में काम करना
पच्चीस की उम्र में मैंने यूबीएस कंपनी के लिए साल भर काम किया। बाद में मुझे जनरल मोटर्स में नौकरी मिल गई। कई लोगों को लगता है कि जनरल मोटर्स पुराने ढर्रे पर चलने वाली बूढ़ी कंपनी है। मगर मैंने यह पाया कि यहां दिलचस्प काम करने की बिल्कुल भी कमी नहीं है। मैंने यहां जो एकमात्र सीमा देखी, वह यह है कि आपको एक निश्चित समय में ज्यादा प्रयास करने होते हैं। मुझे लगता है कि इसी बात की वजह से मैं अधिक मेहनती बन सकी।

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Dhivya Suryadevara
काम और परिवार में सामंजस्य
लंबे वक्त तक मैं अपने परिवार के साथ न्यूयॉर्क में रही हूं, लेकिन मेरा कार्यस्थल डेट्रॉयट शहर में रहा। मैं हर हफ्ते के आखिर में न्यूयॉर्क में रहकर अपनी बेटी और पति के साथ समय बिताती हूं। मैंने हमेशा से ही काम और परिवार के बीच बढ़िया तालमेल बनाकर रखा है। फिर चाहे दफ्तर में दिनभर सैकड़ों मेल के जवाब देने हो या फिर घर में परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभानी हो। मुझे अपनी बेटी को स्कूल छोड़ना और उससे खूब बातें करना बेहद पसंद है। हमारी आपस में इतनी बनती है कि हम दोनों की पसंद-नापसंद एक है।
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Dhivya Suryadevara
छोटी चीजों पर ज्यादा केंद्रित
प्रबंधक के तौर पर मैं एक माइक्रो मैनेजर हूं। दफ्तर में मेरा ज्यादातर वक्त बैठकों में बीतता है। मैं हमेशा छोटी-छोटी मीटिंग आयोजित करना पसंद करती हूं। मैं अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को अलग-अलग दृष्टिकोण से देखती हूं और हमेशा खुद से और अपने साथियों से यही सवाल करती हूं-'हम भूल क्या रहे हैं?'

-दिग्गज वैश्विक ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स की मुख्य वित्तीय अधिकारी बनने वाली पहली महिला के साक्षात्कारों पर आधारित।
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