'हमेशा याद रखिए कि सफलता के लिए किया गया आपका अपना संकल्प किसी भी और संकल्प से ज्यादा महत्त्व रखता है' अब्राहम लिंकन द्वारा कहा गया ये वाक्य न जाने कितने लोगों की सफलता का पर्याय बने होंगे। कहते हैं मेहनत, हौसला, लगन हो तो इंसान कुछ भी हसिल कर सकता है। मेहनत से इंसान अपनी हाथ की रेखाओं को भी बदल सकता है। इसका जीता जागता उदाहरण हैं श्रीकांत बोला...
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श्रीकांत बोला को आज किसी पहचान की जरूरत नहीं है। दुनिया उन्हें 50 करोड़ रुपए की कंज्यूमर फूड पैकेजिंग कंपनी बौलेंट इंडस्ट्रीज के CEO के रूप में जानती है लेकिन श्रीकांत को ये मुकाम यूं ही नहीं हासिल हुआ। इसे हासिल करने के लिए श्रीकांत ने जो कठिन परिश्रम किया वो शायद आप और हम नहीं जानते होंगे।
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आपको ये जानकार हैरानी होगी कि जब श्रीकांत का जन्म हुआ, तो उनके कुछ रिश्तेदारों ने उनके माता-पिता को उन्हें मार देने को कहा था क्योंकि श्रीकांत को जन्म से ही दिखाई नहीं देता था।
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श्रीकांत ने ऐसे परिवार में जन्म लिया था जिनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद श्रीकांत ने 10वीं में 90 फीसदी मार्क्स हासिल किए। वो दसवीं के बाद साइंस पढ़ना चाहते थे लेकिन उनके ब्लाइंड होने के कारण, उन्हें इसकी इजाजत नहीं मिली।
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6 महीने के संघर्ष के बाद आखिरकार उन्हें साइंस सब्जेक्ट्स से पढ़ने की इजाजत मिली लेकिन फिर उन्हें 2009 में IIT दाखिले में भी रिजेक्ट होना पड़ा। इसके बाद उन्होंने विदेश जाकर पढ़ाई करने का फैसला लिया। उन्हें Massachusetts Institute of Technology (MIT), BOSTON, USA में एडमिशन मिल गया।
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भारत लौटकर श्रीकांत ने कुछ कर्मचारियों के साथ अपनी कंपनी शुरू की। आज वो हैदराबाद स्थित 50 करोड़ रुपये की बौलेंट इंडस्ट्रीज कंपनी के मालिक हैं। श्रीकांत की कंपनी अशिक्षित और विकलांगों को नौकरी देती है।
श्रीकांत ने अपने काम से रतन टाटा को इतना प्रभावित कर दिया कि उन्होंने श्रीकांत की कंपनी में इंवेस्ट भी किया। श्रीकांत कहते हैं किसी की सेवा करने का मतलब यह नहीं है कि आप ट्रैफिक लाइट के पास बैठे हुए भिखारी को एक सिक्का दें और आगे बढ़ जाएं। सेवा का मतलब होता है कि आप उसे जिंदगी जीने के मौके उपबल्ध कराएं।