पिता नहीं चाहते थे कि वह एथलीट बने, फिर भी दौड़ा और ऐसा कि मिल्खा सिंह का 60 साल पुराना 'रिकॉर्ड' टूट गया। जानिए कौन है वो...
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Mohammad Anas Yhaiya
आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रही 21वीं कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय एथलीट मोहम्मद अनस याहिया ने मिल्खा सिंह का रिकॉर्ड तोड़ दिया। करीब 60 साल बाद यह रिकॉर्ड टूटा। मिल्खा सिंह ने 1958 के कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में 46.6 सेकेंड के साथ गोल्ड मेडल जीता था। उसके बाद से कोई भी भारतीय धावक फाइनल में पहुंचने में कामयाब नहीं रहा था, लेकिन अनस ने यह कर दिखाया।
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मिल्खा सिंह ने 1958 में मेलबॉर्न में हुई कॉमनवेल्थ गेम्स के इस दौड़ को 46.6 सैकेंड में पूरा किया था, लेकिन भारतीय धावक मोहम्मद अनस ने 400 मीटर स्पर्धा के सेमीफाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए मिल्खा सिंह के रिकॉर्ड की बराबरी की। अनस ने 45.31 सेकेंड का समय निकालकर रेस के फाइनल में प्रवेश किया था। ऐसा करने वाले अनस, मिल्खा सिंह के बाद दूसरे भारतीय बन गए हैं।
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हालांकि अनस फाइनल में .20 सेकेंड से पदक से चूक गए, लेकिन 60 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया। वहीं, यह रिकॉर्ड तोड़ने के साथ ही अनस ने एक नेशनल रिकार्ड भी बनाया। इससे पहले का नेशनल रिकॉर्ड भी 45.32 सेकेंड के साथ मोहम्मद अनस के ही नाम था। रेस का स्वर्ण पदक बोट्सवाना के इसाक माकवाला के नाम रहा, जिन्होंने 44.35 सेंकेंड का समय निकाला। जमैका के जेवान फ्रांसिस सीजन कांस्य पदक जीतने में सफल रहे।
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Mohammad Anas Yhaiya
केरल के कोल्लम जिले के निलामेल से निवासी अनस जब 10वीं क्लास में थे, तब उनके पिता याहिया का हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे सेल्समैन थे और एथलीट रह चुके थे, लेकिन वे नहीं चाहते थे कि अनस एथलीट बने। अनस की मां शीना ने हमेशा उनकी हौसला अफजाई की। अनस पहले लॉन्ग जम्पर बनना चाहते थे, लेकिन आज वे सबसे तेजी से शुरुआत करने वाले धावकों में शुमार माने जाते हैं।
अनस की तेज शुरुआत के पीछे उनके पिता याहिया की एक कहानी है। कोच्चि में एक दौड़ में याहिया पहली बार दौड़ में हिस्सा ले रहे थे। जूते न होने के बावजूद याहिया ने दौड़ में हिस्सा तो ले लिया, लेकिन उन्हें मालूम ही नहीं था कि बंदूक की आवाज का मतलब था कि दौड़ शुरू हो गई है। गोली चली और तेज आवाज भी हुई, लेकिन अनस के पिता को छोड़ कर सारे धावक दौड़ पड़े थे। इस कहानी का अनस पर गहरा प्रभाव पड़ा।