''माउंटेन मैन'' दशरथ मांझी की कहानियां तो आपने खूब सुनी होंगी जिन्होंने ये साबित किया कि कोई भी काम असंभव नहीं है। एक इंसान जिसके पास न तो पैसा था न ही ताकत थी फिर भी तब तक चैन से नहीं बैठे, जब तक कि पहाड़ काटकर रास्ता न बना दिया।
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jadav molai
दशरथ मांझी की तरह ही एक और शख्स ऐसे हैं जिनके इंसानी जज्बे और जुनून की मिसाल ने न्यूयार्क सेंट्रल पार्क जैसा जंगल अकेले ही खड़ा कर दिया। हम बात कर रहे हैं 'फॉरेस्ट मैन' जादव पाएंग की। जिन्हें साल 2012 में 'फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ का खिताब मिला।
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जादव पायंग ने महज 14 साल की उम्र में ही जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान को समझ लिया था और तब से ही उनके जीवन का सिर्फ एक ही लक्ष्य है पेड़ लगाना। साल 1979 में उन्होंने नदी के किनारे पर पेड़ लगाने की शुरूआत की।
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बांस के 20 पेड़ों के बीज से जंगल बोने की शुरूआत करने वाले जादव कड़ी मेहनत से वो बिना हार माने पौधे लगाते रहे। इनकी सालों की कड़ी मेहनत का यह नतीजा हुआ की आज वहां एक बड़ा, घना और सुंदर जंगल तैयार हो गया है।
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नेशनल जियोग्राफिक के अनुसार उनका यह जंगल मोलाई जंगल के नाम से जाना जाता है, उनके इस जंगल में बंगाल बाघ, भारतीय गैंडे और 100 से अधिक हिरण और खरगोश हैं। बंदर और गिद्धों की एक बड़ी संख्या सहित कई किस्मों के पक्षियों का घर अब मोलाई जंगल बन गया है।
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आपको जानकर हैरानी हैरागी कि इतने बड़े जंगल को बनाने वाले जादव का परिवार दूध बेचकर रोजी-रोटी चलाता है। केवल जादव ही निहीं उनका पूरा परिवार इस काम में उनको सपोर्ट करता है और अब सभी मिलकर पेड़ लगाते हैं।
जादव मोलाई के जीवन पर कई डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बन चुकी है। ऐसी बहुत सारी उपलब्धिया हैं जादव मोलाई के नाम जो उनके अभूतपूर्व और अकल्पनीय काम के लिए मिली हैं।
जादव इस बात की मिसाल हैं कि एक इन्सान अगर चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकता।