दीपिंदर गोयल ने इंडिया ही क्या, विदेशों में भी लोगों के खाने का तरीका बदल दिया है। जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर को बचपन से ही पढ़ाई में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी। वह छठीं कक्षा और कॉलेज के प्रथम वर्ष में फेल भी हो गए थे, लेकिन यह उनकी जिंदगी की रुकावट नहीं बनी।
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फेल होने से उन्हें इतना दुख पहुंचाया कि उन्होंने खूब मन लगाकर पढ़ाई करने की ठानी। उन्होंने जमकर मेहनत की और आईआईटी के लिए चयनित हो गए। आईआईटी से डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने मल्टीनेशनल कंपनी 'बेन एंड कंपनी' में काम किया।
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वह काम का ही एक आम दिन था जब उन्हें जोमैटो का आईडिया आया। कैंटीन में खाने के मेन्यू का इंतजार करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि इसमें काफी वक्त जाया होता है। उन्होंने खाने का मेन्यू स्कैन कर के ऑनलाइन डाला जिसे लोगों ने काफी पसंद किया।
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इसी से प्रेरित होकर उन्होंने वेबसाइट खोलने का सोचा जिसमें लोगों को आसपास के रेस्टोरेंट की जानकारी मिल सके। अपने सहकर्मी पंकज चड्ढा के साथ मिलकर उन्होंने 2008 में 'फूडीबे' खोली जिसमें रेस्टोरेंट के मेन्यू से लेकर उसकी समीक्षा भी होती थी।
अब फूडीबे जोमैटो बन गया है। जोमैटो अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया समेत 23 देशों में अपनी सुविधा देता है। एक कमरे से शुरू हुई दीपिंदर गोयल की कंपनी की कीमत आज 600 करोड़ से ज्यादा की है।