hima das
बचपन में खेला है फुटबॉल
मेरा खेलों से जुड़ाव शुरू से ही रहा, पर न मैंने और न ही मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने एथलेटिक्स को कभी तवज्जो दी। मेरे पिता की आर्थिक हैसियत भी इतनी बेहतर नहीं थी कि वह मुझे खेलों में करियर बनाने के लिए जरूरी ट्रेनिंग मुहैया करा सकें। मैं फुटबॉल जरूर खेलती थी, लेकिन वह भी अपने गांव के स्कूल के बिना घास वाले मैदान पर। लड़के, लड़कियों, मैं हर किसी के साथ खेलती। थोड़ी बड़ी हुई, तो मैंने कुछ स्थानीय क्लबों के लिए भी फुटबॉल खेला और क्लबों के लिए खेलते हुए पहली दफा देश के लिए खेलने का भी ख्वाब देखा।