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नेत्रहीन होकर भी गूगल में हैं वकील, हैरान कर देगी इनकी कहानी

Mon, 19 Dec 2016 01:32 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : Nextshark
अपनी कमजोरी से लड़कर कुछ ही लोग आगे बढ़ पाते हैं। ये वह लोग होते हैं जिनमें कुछ कर गुजरने का जूनून होता है। राह में भले ही कितनी भी मुश्किलें आएं, यह पीछे नहीं हटते। ऐसे ही जूनून और जज्बे की कहानी है जैक चेन की जिन्होंने अपने हौसले से सबके लिए मिसाल पेश की है।
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जैक चेन न्यूयार्क शहर के रहने वाले हैं। बचपन से ही उनकी नजरें कमजोर थीं। वह केवल रोशनी को पहचान पाते थे और रंगों को थोड़ा बहुत समझ पाते थे। जैक कहते हैं, "मैं कारें नहीं देख पाता था इसलिए मुझे आवाजों पर निर्भर रहना पड़ता था। तब इलेक्ट्रिक कारें ज्यादा लोकप्रिय नहीं थीं।"
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जैक की अभी तक कई सर्जरी हो चुकी थीं। 16 साल की उम्र में जैक की आंखों की आठवीं सर्जरी हुई। इस सर्जरी से उम्मीद की गई कि जैक अब देखने लगेंगे लेकिन सर्जरी के दौरान जैक की बची हुई आईसाइट भी चली गई।

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लेकिन दृष्टिबाधित होना उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनाया। जैक ने अपनी पढ़ाई जारी रखी और बहुप्रतिष्ठित हावर्ड और बर्कले यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में डिग्री ली। एक मल्टीनेशनल कंपनी में इंटर्न लगने के बाद उन्होंने और कई बड़ी कंपनी में काम किया।
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2010 में उन्होंने गूगल ज्वाइन किया। पिछले छह सालों से वह इस कंपनी में असोसिएट पेटेंट काउंसल के तौर पर काम कर रहे हैं। गूगल में काम करना जैक के लिए आसान नहीं है। वह रोजाना बाकी कर्मचारियों से ज्यादा मेहनत करते हैं।
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जैक पढ़ नहीं सकते इसलिए सभी शब्दों को सुनते हैं। लेकिन एक-एक शब्द सुनना जैक का काफी समय ले लेता था। अपनी स्पीड बढ़ाने के लिए जैक अब हर मिनट 620 शब्द सुनते हैं। कोई आम इंसान इतने शब्द एक मिनट सुने तो उसे कुछ समझ ही नहीं आएगा।
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जैक की मुश्किलें यहीं नहीं खत्म होती। ऑफिस आने-जाने के लिए भी उन्हें खास ध्यान रखना होता है। देख ना पाने के कारण उन्हें अपने कानों पर निर्भर रहना पड़ता है। वह हर चीज सुनकर ही प्रतिक्रिया देते हैं।

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मैनहेट्टन की व्यस्त सड़कें और स्टेशनों की भाग-दौड़। इन सभी दिक्कतों का सामना जैक रोजाना करते हैं। उन्हें सबसे ज्यादा मुश्किल ट्रेन स्टेशनों में खंभों से होती है। जैक कहते हैं, "मैं खूशबू के जरिए अपना रास्ता याद करता हूं। मेरे रास्ते में कॉफी शॉप और सबवे आते हैं और इनकी खूशबू बाहर तक आती है। वे मेरे लिए लैंडमार्क जैसे हैं। सबवे आते ही मैं समझ जाता हूं कि मुझे अब बाएं मुड़ना है।"
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काम के अलावा जैक को एडवेंचर स्पोर्ट्स का भी काफी शौक है। 2012 में उन्होंने तंजानिया, अफ्रीका के माउंट किलिमंजारो पर चढा़ई की थी। यह दुनिया की सबसे दुर्गम चढ़ाई में से एक है।

इतनी मुश्किलों के बावजूद जैक ने आगे बढ़ना कभी नहीं छोड़ा। वह अपनी जिंदगी बाकी आम नागरिकों की तरह ही जीते हैं। वह हम सभी के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।
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