कहते हैं कि जहां चाह है वहां राह है.....जी हां ऐसी ही कुछ कहानी है रमेश घोलप की। महाराष्ट्र के सोलापुर का रहने वाला एक शख्स जो कभी मां के साथ चूड़ियां बेचकर अपना पेट पालता था आज वो एक IAS ऑफिसर है। गरीबी और पोलियो से पीड़ित रमेश ने अपनी जिंदगी से कभी हार नहीं मानी और आज वह सबके लिए एक बड़ी मिसाल बन गए हैं।
पढ़ेंः Success Story: एक हादसे में गंवाए दोनों हाथ लेकिन नहीं मानी हार और किया ये बड़ा काम
विज्ञापन
2 of 5
रमेश के पिताजी अपनी पंक्चर की दुकान से 4 लोगों के परिवार का किसी तरह से भरण-पोषण करते थे। हालांकि ज्यादा शराब पीने के कारण उनकी तबीयत खराब हो गई और उनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। परिवार का गुजर-बसर करने के लिए रमेश की मां ने आसपास के गांवों में चूड़ियां बेचना शुरू किया। रमेश और उनके भाई इस काम में अपनी मां की मदद करते थे लेकिन भगवान को शायद उनकी और परीक्षा लेनी थी इसलिए रमेश को बाएं पैर में पोलियो हो गया।
विज्ञापन
3 of 5
रमेश के गांव में पढ़ाई के लिए केवल एक ही प्राइमरी स्कूल था। रमेश को आगे की पढ़ाई करने के लिए उनके चाचा के पास बरसी भेज दिया गया। रमेश को पता था कि केवल पढ़ाई ही उनके परिवार की गरीबी को दूर कर सकती है, इसलिए वह दिल लगाकर पढ़ाई करने लगे।
पढ़ेंः जन्म लेते ही मां ने फेंका था कूड़े में, आज अमेरिका में जी रही हैं ऐसी लाइफ
4 of 5
रमेश पढ़ाई में काफी अच्छे थे। जब उनके पिता की मौत हुई तब वह 12वीं की परीक्षा की तैयारी में जुटे हुए थे। रमेश के परिवार की हालत ऐसी थी कि उन लोगों के पास अपने पिता की अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए 2 रुपए भी नहीं थे। किसी करह से पड़ोसियों की मदद से वह पिता की अंतिम यात्रा में शामिल हो पाए।
उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था लेकिन फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और 88 प्रतिशत अंक के साथ 12वीं की परीक्षा पास की। 12वीं के बाद उन्होंने डिप्लोमा किया और 2009 में शिक्षक बन गए लेकिन रमेश यहीं रुकने वाले नहीं थे। उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और IAS की परीक्षा की तैयारी में जुट गए। कड़ी मेहनत के बाद आखिरकार उन्होंने साल 2012 में सिविल सेवा परीक्षा में 287वीं रैंक हासिल की। इस सफलता के बाद जब वह पहली बार अपने गांव पहुंचे तो गांव वालों की खुशी का ठिकाना न रहा।