मिलिए ब्रेव डॉटर ऑफ इंडिया से। इस बेटी पर न केवल उसकी बहन को नाज है, बल्कि पूरे गांव, जिले, प्रदेश और देश भर को गर्व है। पीएम मोदी भी गर्व करेंगे। छोटी सी उम्र में इतना हौंसला, इतनी लगन देखकर आप इसे सलाम करेंगे।
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बहादुर बेटी
ये बहादुर बेटी है हरियाणा के यमुनानगर की। कहते हैं कि डूबते हुए को तिनके का सहारा होता है, लेकिन इस मासूम के पास न तो कोई सहारा है और न ही कोई उम्मीद। मां-बाप हैं नहीं, पर पढ़ना चाहती है, कुछ बनना चाहती है। इसलिए कूड़ा बीन कर रुपये जमा करती है और किताबें-ड्रेस खरीदकर स्कूल जाती है। हम तीसरी क्लास में पढ़ने वाली इस मासूम की पहचान उजागर नहीं करेंगे, लेकिन सरकार और सिस्टम से सवाल जरूर करेंगे कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ के विज्ञापन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, पर नतीजा कहां नजर आया।
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बहादुर बेटी
देश भर में ऐसी कई मासूम बेटियां हैं, जिन्हें कोई मदद नहीं मिलती। उन्हें में से एक है यमुनानगर के आजाद नगर में रहने वाली आठ साल की मुस्कान (बदला हुआ नाम), जो सुबह स्कूल जाने से पहले एक घंटा गलियों में घूमकर कूड़ा बीनती है, फिर तैयार होकर स्कूल जाती है। स्कूल से घर लौटकर फिर से कूड़ा बीनने निकल जाती है। शाम को इसे बेचकर चंद रुपये कमाती है। रोजाना जरूरत के सामान पर खर्च करने के बाद बचे हुए पैसों को जमा करती है। इसी पैसे से पेन, पेंसिल, कॉपी और ड्रेस खरीद कर अपनी पढ़ाई पूरी करती है।
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बहादुर बेटी
बचपन में ही माता-पिता का उठा साया
पता चला है कि मुस्कान के सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया। उसके बाद वह अपने मामा के पास रहने लगी। अब कुछ समय से वह अपनी बहन के पास रह रही है। बहन की माली हालत भी काफी खराब है, जिसकी वजह से वह मुस्कान की पढ़ाई का खर्च उठाने में असमर्थ है। ऐसे में मुस्कान के पास इस काम के अलावा कोई विकल्प नहीं है। दूसरों की फेंकी हुई अलग-अलग तरह की चप्पलें पहनकर स्कूल जाती है तो बच्चे उसका मजाक उड़ाते हैं, लेकिन इसकी परवाह किए बिना वह पढ़ती है और फिर उसी दिनचर्या पर निकल जाती है।
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mid day meal
मिड डे मील लंच और दिनभर की कमाई से डिनर
मुस्कान चाय व बिस्कुट से नाश्ता कर घर से निकलती है। स्कूल में मिड डे मील के रूप में लंच मिल जाता है। उसके बाद दिनभर कूड़ा बीन कर जो चंद रुपयों की कमाई होती है, उसी से रात का खाना खाती है। फिलहाल उसके पास स्कूल की एक ही वर्दी है। जिसे वह शाम को रोजाना धोकर सुबह स्कूल पहनकर जाती है।
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beti padhao beti bachao
चाइल्ड लाइन को किया मना
मुस्कान मेहनत करके सफल होना चाहती है। बुधवार को चाइल्ड लाइन की निदेशिका अंजू बाजपेयी लड़की की काउंसिलिंग करने पहुंची तो उसने कह दिया कि वह भीख नहीं मांगती। अपनी मर्जी से मेहनत करके अपना खर्चा निकाल रही है। जिस सरकारी स्कूल में वह पढ़ती है, वहां के प्रिंसिपल व टीचर्स को भी पता है।
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beti padhao beti bachao
मैं पढ़ना चाहती हूं। बचपन में ही मेरे मम्मी पापा की मौत हो गई थी। मामा-मामी के पास कुछ दिन रही। अब अपनी बहन के पास रहती हूं, लेकिन जीजा भी कोई काम नहीं करता। उन पर बोझ न पड़े, इसलिए पेट भरने के लिए अपना काम खुद करती हूं। - मुस्कान
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beti bachao beti padhao
हम बच्ची की काउंसिलिंग कर रहे हैं, लेकिन वह बाल सेंटर में नहीं रहना चाहती। हम उसके साथ जबरदस्ती नहीं कर सकते और उसकी काउंसिलिंग जारी रखेंगे। आर्थिक मदद के भी प्रयास किए जा रहे हैं। - अंजू बाजपेयी, निदेशिका, चाइल्ड लाइन, यमुनानगर
कमजोर आर्थिक स्थिति के बच्चों की पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करती है। इस बारे में मैं संबंधित स्कूल से रिपोर्ट लूंगा कि इस बच्ची को वन टाइम और क्वार्टरली धनराशि, कापी किताबें व ड्रेस मिलती है या नहीं। बच्ची की हरसंभव मदद के लिए सरकार को लेटर भेजा जाएगा। - आनंद चौधरी, डीईओ