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Russia-Ukraine War: यूक्रेन से लौटे छात्रों को मिल सकता है पढ़ाई पूरी करने का मौका, सरकार के पास हैं ये विकल्प

Fri, 04 Mar 2022 07:57 AM IST
सुभाष कुमार एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Russia-Ukraine War: फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग (FMGL) रेगुलेशन एक्ट-2021 के अनुसार किसी भी विदेशी मेडिकल कॉलेज के छात्र को भारत में प्रैक्टिसिंग के लिए स्थायी पंजीकरण की आवश्यकता होती है।
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pm modi - फोटो : सोशल मीडिया
रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग (Russia Ukraine War) का असर वहां हजारों की संख्या में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों (Indian Students) पर भी पड़ा है। ज्यादातर छात्रों ने यूक्रेन छोड़ दिया है और कईयों को सरकार सुरक्षित वापस भारत ले आई है। इनमें से अधिकांश मेडिकल विद्यार्थी हैं। अब इन छात्रों की शिक्षा अधर में लटक चुकी है, क्योंकि ये छात्र कब वापस जाएंगे और कब इनकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो पाएगी? यह कहना अभी मुश्किल है। 
देश में इस बात पर चर्चा जारी है कि सरकार इन छात्रों के पाठ्यक्रम को पूरा कराने के लिए कोई कदम उठा सकती है या नहीं। क्या ये मेडिकल स्टूडैंट भारत में रहकर सरकारी और निजी संस्थानों में अपनी आगे की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं? क्या सरकार इनके भविष्य के लिए अपने नियमों में बदलाव करेगी? या फिर इन्हें किसी अन्य देश में पढ़ने भेजेगी? अमर उजाला आपको बता रहा है उन उपायों के बारे में जिनसे सरकार इन छात्रों की पढ़ाई को अधर में लटकने से बचा सकती है...
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Medical Education - फोटो : Social Media
सरकार कर रही विचार
यूक्रेन से वापस लौटे ऐसे छात्र जिनके पाठ्यक्रम समाप्त नहीं हुए हैं उन्हें सुविधा देने के लिए सरकार जल्द ही कोई फैसला ले सकती है। ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार नेशनल मेडिकल कमीशन से बात कर के फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग (FMGL) रेगुलेशन एक्ट-2021 में बदलाव कर सकती है। खबरों के अनुसार इस मुद्दे पर इसी हफ्ते बैठक भी आयोजित की जा सकती है।
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Medical Education - फोटो : Social Media
क्या है एफएमजीएल नियम
फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट लाइसेंसिंग (FMGL) रेगुलेशन एक्ट-2021 के अनुसार किसी भी विदेशी मेडिकल कॉलेज के छात्र को भारत में प्रैक्टिसिंग के लिए स्थायी पंजीकरण की आवश्यकता होती है। स्थायी पंजीकरण के लिए छात्रों के पास में न्यूनतम 54 महीनों की शिक्षा और एक साल की इंटर्नशिप होनी जरूरी है। इसके बाद ही छात्र एफएमजीई परीक्षा को पास कर के भारत में प्रैक्टिसिंग के लिए स्थायी पंजीकरण को प्राप्त कर सकते हैं। 

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Medical Education - फोटो : Social Media
अन्य विश्वविद्यालय और संस्थानों में प्रवेश
ऐसी कई खबरें सामने आई हैं जिनमें कहा जा रह है कि सरकार यूक्रेन से वापस लौटे छात्रों का डाटा इकट्ठा करवा रही है। ऐसी उम्मीद है कि इन छात्रों को भारत या किसी अन्य देश के विश्वविद्यालय में प्रवेश दिलाकर बचे हुए पाठ्यक्रम को पूरा करवा सकती है। हालांकि, यह उपाय तब अपनाए जाएंगे जब यूक्रेन में हालात सामान्य न हो रहे हों। अगर यूक्रेन में जल्द ही हालात सामान्य हो जाते हैं तो छात्रों को वापस बुलाया जा सकता है। 
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Medical Education - फोटो : Social Media
क्रेडिट ट्रांसफर स्कीम की मांग
लंबे समय छात्र देश में क्रेडिट ट्रांसफर स्कीम की मांग भी कर रहे हैं। क्रेडिट ट्रांसफर स्कीम का आशय उस व्यवस्था से है जिसमें एक छात्र को पाठ्यक्रम के दौरान कॉलेज बदलने की सुविधा प्रदान की जाए। विभिन्न यूरोपियों और अन्य देशों में छात्रों को यह सुविधा दी जाती है। अगर यह व्यवस्था भारत में भी लागू हो जाए तो यूक्रेन से लौटे छात्रों के साथ-साथ भविष्य के भी छात्रों के लिए भी सुविधा मिलेगी। इसका फायदा यह होगा कि कॉलेजों में सीटों की संख्या में इजाफा होगा और अधिक छात्रों को मेडिकल शिक्षा का फायदा मिल सकेगा। 
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Medical Education - फोटो : Social Media
कॉलेजों की सीटें बढ़ाई जाए
यूक्रेन से लौटे छात्रों के पाठ्यक्रम को पूरा कराने में एक बड़ी समस्या कॉलेज में कम सीटों की उपलब्धता भी है। हम पहले भी इस बात को बता चुके हैं कि भारत से बड़ी संख्या में छात्रों के बाहर पढ़ने जाने का एक बड़ा कारण देश में मेडिकल सीटों की कमी भी है। इस चुनौती से निबटने के लिए सरकार को नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों का निर्माण और निजी संस्थानों में सीटों की संख्या बढ़ाना चाहिए। इसके अलावा सरकार चाहे तो विभिन्न जिला अस्पतालों तक में भी मेडिकल की पढ़ाई के लिए सीटों की व्यवस्था करा सकती है। 
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Medical Education - फोटो : Social Media
फीस पर शिकंजा
हाल ही में यह सूचना आई है कि सरकार आगामी सत्र से सभी निजी मेडिकल शिक्षण संस्थानों में के 50 फीसदी सीटों के शुल्क को सरकारी मेडिकल कॉलेज के बराबर करने पर फैसला ले सकती है। अगर यह फैसला लागू होता है तो अनगिनत छात्रों को इसका फायदा मिलेगा। इस फैसले में कॉलेजों की ओर से लगाए जाने वाले कैपिटेशन फीस पर भी रोक लगाने की बात की गई है। इसके साथ ही सरकार चाहे तो इस बात का भी  उपाय कर सकती है कि यूक्रेन से लाखों रुपये का नुकसान उठाकर वापस लौटे छात्रों को नए कॉलेज की फीस में रियायत दी जाए। इससे उन छात्रों को और अधिक राहत मिलने की उम्मीद है।   
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Medical Education - फोटो : Social Media
क्या होंगे फायदे?
यह बात पहले से ही जाहिर है कि देश में आबादी के मुकाबले डॉक्टरों की संख्या में भारी कमी है। अगर इन उपायों पर काम किया जाए तो एक साथ कई फायदे सामने आ सकते हैं। पहला यूक्रेन के छात्रों का पाठ्यक्रम पूरा होगा। दूसरा अधिक सीटों के होने से छात्रों के बाहर जाने की समस्या में कमी आएगी और तीसरा कि देश में डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि होगी और इसका सीधा फायदा आम जनता को ही मिलेगा। 
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