"जिंदगी में हर बात नजरिए की है। अगर आप अपने अंदर की कमी को ही देखते रहेंगे तो प्रयास कब करेंगे। लोगों को अपनी आंखों से पर्दा हटाकर हमसे हमदर्दी जताने की जगह हमारा हौसला देखना चाहिए।'' ये शब्द हैं दृष्टिहीन होने के बावजूद अपने हौसले और हिम्मत की बदौलत वकालत की दुनिया में अपना नाम कमाने वाले पंकज सिन्हा के।
पंकज सिन्हा की शुरुआती जिंदगी काफी कठिन रही। उन्हें दर-दर दृष्टिहीन होने की वजह से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लेकिन तमाम परेशानियों से जूझने के बाद भी पंकज सिन्हा ने कानून की दुनिया में समाज के कमजोर लोगों की आवाज बनकर एक मुकाम हासिल किया है। आज वह दिल्ली हाईकोर्ट में वकालत करते हैं।
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