चीन के वुहान शहर से दुनियाभर में फैल रहा कोरोना वायरस थमने का नाम नहीं ले रहा। इस खतरनाक विषाणु की वजह से वैश्विक स्तर पर 3,100 लोगों की मौत हो गई है जबकि संक्रमित मरीजों की संख्या हजारों में है। भारत में भी कोरोना वायरस की वजह से दहशत फैली हुई है।
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corona virus
- फोटो : social media
दुनियाभर के 70 देशों में फैले कोरोना वायरस ने चीन के बाद सबसे ज्यादा कहर दक्षिण कोरिया में मचाया है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि वे कोरोना वायरस का इंजेक्शन तैयार हो चुका है।
आखिर क्या है वो इंजेक्शन? किस प्रकार हो रहा है लोगों पर परीक्षण? इन सवालों के जवाब आपको आगे की स्लाइड में मिल जाएंगे।
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कोरोना वायरस
- फोटो : ANI
वैज्ञानिकों ने जानकारी दी है कि कोरोनावायरस का टीका तैयार हो चुका है।
साथ ही परीक्षण भी शुरू हो गया है जो कि दो महीने के अंदर खत्म भी हो जाएगा।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एलर्जी इनफेक्शियस डिजीज (National Institute of Allergy and Infectious Diseases) के डायरेक्टर Dr. Anthony Fauci ने बताया कि कोरोना के वैक्सीन को तैयार करने के लिए अमेरिकी टीम जुटी हुई है और उन्हें काफी हद कर सफलता हासिल हो चुकी है।
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coronavirus
- फोटो : ANI
वैज्ञानिकों ने यह भी बताया कि पहले ट्रायल के रिजल्ट में लगभग 2 से 3 महीने लग सकते हैं।
इसके बाद सैंकड़ों लोगों के साथ बड़े स्तर पर ट्रायल किया जाएगा।
पहले चरण के ट्रायल के लिए कुल 45 मरीजों को लिया जाएगा।
डॉक्टर कहते हैं कि मार्केट में टीका आने में लगभग एक से डेढ़ साल का समय लग सकता है।
अगर दो स्तरों में से किसी एक में भी निराशा हासिल हुई तो फिर से जेनेटिक सीक्वेंस पर काम करना होगा।
अमेरिका की बायोटेक्नोलॉजी कंपनी Moderna ने 24 फरवरी को एक प्रेस का आयोजन किया था, जिसमें बताया कि वे कोरोना के टीके NIAID यानी (National Institute of Allergy and Infectious Diseases) को भेज चुके हैं।
ये ट्रायल के लिए उपयोग में लाई जाएगी।
डॉक्टर ने फिर से बताया है कि टीका बाजार में तब लाया जाएगा, जब यह सुनिश्चित हो जाए कि टीका मानव शरीर में किस प्रकार से प्रक्रिया कर रहा है।
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO- World Health Organization) ने भी कोरोनावायरस पर अध्ययन किया और ये समझने की कोशिश की कि किस उम्र के लोगों को ज्यादा खतरा है। अध्ययन में पाया गया कि चीन में जिन लोगों में ये वायरस मिला है वे अधिकतर लोग बुजुर्ग हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि मरीज पहले से ही दिल की बीमारी (जैसे- हाइपरटेंशन आदि) से ग्रस्त हैं।