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Tips: हर खबर आपके काम की हो जरूरी नहीं, डूमस्क्रॉलिंग से बचें; डिजिटल युग में विवेक से करें सही का चुनाव

Mon, 01 Sep 2025 11:03 AM IST
शिवम गर्ग रेजा शबाहांग, रिसर्च फेलो फ्लिंडर्स यूनिवर्सिटी, ऑस्ट्रेलिया

सार

Digital News Stress: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खबरें हमारी रोजमर्रा की आदत बन चुकी हैं। लेकिन जरा ठहरकर सोचिए- क्या वाकई हर खबर हमारे लिए जरूरी है? अक्सर हम नकारात्मक समाचारों में इतना उलझ जाते हैं कि यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य और शांति पर असर डालने लगते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobe stock
Digital News Stress: आज के डिजिटल युग में सूचनाओं का सैलाब हमारे चारों ओर उमड़ रहा है। हर पल नई खबरें मोबाइल या टीवी स्कीन पर नजर आ जाती हैं। अब खबरों की दुनिया जितनी रंगीन और जुड़ाव से भरी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी बन चुकी है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि अक्सर ऐसी नकारात्मक खबरें देखने को मिलती हैं, जो आपको विचलित कर देती हैं। हैरानी की बात यह है कि भले ही ऐसी खबरें आपको परेशान करती हों, लेकिन फिर भी आप इनसे नजरें नहीं हटा पाते, क्योंकि आपको लगता है कि खबरों से जुड़े रहना जरूरी है। सुर्खियों से अपडेट रहना अच्छी बात है, किंतु सही जानकारी और मानसिक शांति के बीच संतुलन होना भी उतना ही जरूरी है। 

ऐसे में, सवाल यह है क्या हर खबर आपके लिए सही और फायदेमंद होती है? आप कैसे पता कर सकते हैं कि कौन-सी खबर आपके काम की है और कौन-सी नहीं? यहां ऐसी ही कुछ युक्तियों के बारे में बताया गया है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobe stock

तनाव का असली कारण

सबसे पहले तो आपको यह जानना होगा कि आखिर खबरें आपको कैसे प्रभावित करती हैं। दरअसल, हमारा दिमाग स्वाभाविक रूप से सुरक्षा को तवज्जो देता है और खतरे के संकेतों पर तुरंत प्रतिक्रिया करता है। जब हम बार-बार परेशान करने वाली खबरों को देखते या पढ़ते हैं, जिसे आजकल डूमस्क्रॉलिंग कहा जाता है, तो यह प्रक्रिया हमें मानसिक रूप से थका देती है। ऐसे समाचार हमें अपने और दुनिया के प्रति अधिक नकारात्मक सोचने, निराशा तथा अविश्वास महसूस कराने लगते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : adobe photo stock

आंख मूंदकर भरोसा न करें

हर खबर पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय कुछ क्षण रुकें और खुद से सवाल करें कि क्या इस खबर से आपको तनाव महसूस हो रहा है या क्या यह आपके काम की है? अपने मन और शरीर की प्रतिक्रिया को पढ़ें और तय करें कि क्या अभी नकारात्मक समाचार देखने या पढ़ने का सही वक्त है या नहीं।

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खबरों के जाल में फंसने से बचें

जब भी आप कोई लेख या वीडियो देखें, सबसे पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करें। यह भी देखें कि जानकारी कहां से आ रही है, उसका स्रोत क्या है और क्या वह प्रमाणिक है। साथ ही, ध्यान दें कि वह आपको कैसा महसूस करा रही है। अगर उस खबर से आपका कोई सरोकार नहीं है या वह आपके तनाव का कारण बन सकती है, तो बेहतर होगा कि उसे नजरअंदाज करें।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

अगर खुद को रोक न पाएं

अगर आप बार-बार नकारात्मक खबरें देखने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं और आपकी चिड़चिड़ापन, थकान, नींद में कमी जैसी आदतें बढ़ती जा रही हैं, तो ये संकेत हैं कि आपका मानसिक स्वास्थ्य जोखिम में है। ऐसे में, अपनी पसंदीदा गतिविधियों में समय विताएं। प्राकृतिक वातावरण में टहलें या बागवानी व पेंटिंग जैसी हाथों से की जाने वाली रचनात्मक गतिविधियां करें। इनसे तनाव को कम करने में काफी मदद मिल सकती है। - द कन्वर्सेशन
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