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Gregorian Calendar : भारत में 268 साल पहले बदली गई थी नए साल की परंपरा, जानिए क्या थी मजबूरी

Mon, 28 Dec 2020 03:49 PM IST
Devesh Devesh एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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ग्रिगोरियन कैलेंडर : नए साल के बारे में जानें रोचक जानकारी - फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में नए साल के जश्न की तैयारियां हो रही हैं। 31 दिसंबर, 2020 की रात को 12 बजते ही नया साल शुरू हो जाएगा। 01 जनवरी, 2021 की सुबह नए साल का पहला दिन होगा। हालांकि, प्रत्येक वर्ष 01 जनवरी आने के साथ ही एक बहस छिड़ जाती है कि आज ही नया साल क्यों है? इसकी शुरुआत कब और कैसे हुई?
भारत ने अंग्रेजी नव वर्ष को क्यों स्वीकारा और क्यों बदला अपनी गौरवशाली परंपरा वाले भारतीय नव वर्ष विक्रमी संवत को, आदि। आइए जानते हैं आखिर क्या है ग्रिगोरियन कैलेंडर, किस देश ने कब माना एक जनवरी को नया साल और क्या थी हमारे देश की मजबूरी... 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
दुनियाभर में तमाम तरह के कैलेंडर माने जाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक भारत के 36 तरह के प्राचीन कैलेंडर वर्ष माने जाते हैं। हालांकि, इनमें से अधिकांश अब प्रचलन से बाहर हैं। दुनियाभर में कई देशों के जो अपने कैंलेंडर हैं उनमें नए वर्ष की शुरुआत फरवरी से अप्रैल के मध्य होती है। हमारे यहां भी विक्रम संवत, शक संवत, हिजरी सन और सप्तर्षि संवत आदि प्रचलित हैं। इसके अलावा भी कई सारे देशों में अलग-अलग कैलेंडर भी चलन में हैं मगर पूरी दुनिया में नया साल ग्रिगोरियन कैलेंडर के अनुसार ही मनाया जाता है।  
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Lucknow Happy New Year 2020 - फोटो : amar ujala
वर्तमान ग्रिगोरियन कैलेंडर Gregorian Calendar की शुरुआत 438 साल पहले 15 अक्तूबर, 1582 को हुई थी। इस कैलेंडर को आखिरी बार पोप ग्रिगरी 13वें ने संशोधित किया था। ग्रिगोरियन कैलेंडर के अनुसार, क्रिसमस हर वर्ष 25 दिसंबर को निश्चित हो गया। जबकि 31 दिसंबर को साल का आखिरी दिन होता है और नया साल एक जनवरी को शुरू होता है। अमेरिका के नेपल्स के फिजीशियन एलॉयसिस लिलिअस ने 15 अक्तूबर, 1582 को ग्रिगोरियन कैलेंडर के तौर पर एक नया कैलेंडर का इस्तेमाल प्रस्तावित किया था। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
जूलियन कैलेंडर
इससे पहले रूस का जूलियन कैलेंडर प्रचलन में था, जिसमें साल में 10 महीने होते थे। इसमें समस्या यह थी कि क्रिसमस साल में एक निश्चित दिन नहीं आता था। जूलियन कैलेंडर को ईसा पूर्व 46 में जूलियस सीजर ने संशोधित किया था। इससे भी पहले तक जो कैलेंडर चलता था, वह रोमन कैलेंडर था। उसमें साल के सिर्फ 304 दिन ही होते थे। महीने 10 ही थे। 
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space - फोटो : pexels.com
सूर्य और चंद्रमा की गणना पर आधारित
कोई भी कैलेंडर सूर्य चक्र या चंद्रमा चक्र की गणना पर आधारित होता है। सूर्य चक्र पर आधारित कैलेंडर में 365 दिन होते हैं। जबकि चंद्रमा चक्र पर आधारित कैलेंडर में 354 दिन होते हैं। ग्रिगोरियन कैलेंडर सूर्य चक्र पर आधारित है। 
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calender
लीप ईयर
इसमें हर महीने में बराबर दिन भी नहीं हैं। चार माह 30 दिन वाले हैं, छह माह 31 दिन वाले हैं। साथ ही फरवरी एक ऐसा महीना है जिसमें 28 दिन होते हैं लेकिन हर तीन साल बाद यानी चौथा वर्ष लीप ईयर होता है तब फरवरी में 28 के स्थान पर 29 दिन होते हैं। 
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ब्रिटिश शाही परिवार - फोटो : Social media
ब्रिटिश शासन बना मजबूरी : 
हमारे देश में आज भी अधिकांश धार्मिक कार्य हिंदू लोग विक्रमी संवत जबकि मुस्लिम लोग हिजरी सन के अनुसार ही करते हैं। भले ही रोजमर्रा का काम ग्रिगोरियन कैलेंडर से किया जाता है। ग्रिगोरियन कैलेंडर को मानना एक प्रकार से हमारी देश की मजबूरी भी थी। ग्रिगोरियन कैलेंडर स्वीकार किए जाने के वक्त देश में ब्रिटिश शासन लागू था। इसलिए, जब 1752 में ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम ने ग्रिगोरियन कैलेंडर को स्वीकारा तो दुनिया में जहां भी उनका शासन था और उपनिवेश थे, वहां ग्रिगोरियन कैलेंडर को लागू कर दिया गया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
किसने कब स्वीकारा
  • फ्रांस, इटली, पुर्तगाल, स्पेन, पौंलेंड : 1582 
  • ऑस्ट्रिया एवं कैथोलिक देश : 1583
  • अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और उसके उपनिवेश देश : 1752
  • जापान : 1873
  • चीन : 1912
  • रूस, एस्तोनिया : 1918
  • ग्रीस : 1923
  • तुर्की : 1927
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