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नीट पीजी काउंसलिंग 2026: चॉइस फिलिंग में कैसे चुनें कॉलेज और कोर्स? चुनाव करते समय ये पांच बातें जरूर चेक करें

Mon, 12 Oct 2026 11:44 PM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

NEET PG Counselling 2026: नीट पीजी काउंसलिंग 2026 में कॉलेज और कोर्स चुनते समय केवल अपनी रैंक पर निर्भर न रहें। पिछले वर्ष की कटऑफ, पाठ्यक्रम, कॉलेज की मान्यता, पूरी फीस, छात्रावास, अस्पताल में मरीजों की संख्या और प्रशिक्षण की सुविधाएं भी जांचें। सही विकल्प भरने से पहले अपनी प्राथमिकता सूची तैयार करें। जानें, मेडिकल कॉलेज चुनते समय किन पांच जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए, ताकि आगे परेशानी न हो।
 
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NEET PG Counselling 2026 - फोटो : AI Generated
नीट पीजी काउंसलिंग 2026 में दाखिले के लिए विकल्प भरते समय सबसे पहले अपनी रुचि और भविष्य की योजना को समझें। एमडी, एमएस या अन्य स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में से अपनी पसंद तय करें। इसके बाद संबंधित विषय के पाठ्यक्रम, पढ़ाई के तरीके और प्रशिक्षण की सुविधाओं के बारे में जानकारी जुटाएं। केवल किसी कॉलेज की लोकप्रियता देखकर पाठ्यक्रम न चुनें। यह भी जांचें कि संबंधित विभाग में पढ़ाई के साथ मरीजों के उपचार का कितना व्यावहारिक अनुभव मिलता है। सही पाठ्यक्रम का चुनाव आगे की विशेषज्ञता और चिकित्सा करियर के लिए महत्वपूर्ण है।
 
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NEET PG Counselling 2026 - फोटो : AI Generated

अपनी रैंक और पिछले वर्ष की कटऑफ कैसे जांचें?

कॉलेजों की सूची तैयार करने से पहले अपनी नीट पीजी रैंक, आरक्षण श्रेणी और पात्रता को ध्यान में रखें। पिछले वर्ष की कटऑफ से आपको यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस कॉलेज में दाखिला मिलने की संभावना है। हालांकि, पुरानी कटऑफ के आधार पर सीट मिलने की गारंटी नहीं होती। सीटों की संख्या, अभ्यर्थियों की पसंद और इस वर्ष की प्रतिस्पर्धा के कारण कटऑफ बदल सकती है। इसलिए विकल्पों की सूची में पहले अपनी पसंद के कॉलेज, फिर रैंक के अनुसार संभावित विकल्प और अंत में दूसरे उपयुक्त कॉलेज शामिल करें। यह भी पढ़ें: नीट पीजी काउंसलिंग के लिए पंजीकरण शुरू, कब भरें कॉलेज का विकल्प और कैसे मिलेगी सीट? जानें पूरी प्रक्रिया
 
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NEET PG Counselling 2026 - फोटो : AI Generated

कॉलेज की मान्यता और अस्पताल की सुविधाएं क्यों जांचें?

मेडिकल कॉलेज चुनते समय उसकी मान्यता और संबंधित पाठ्यक्रम की स्वीकृति की पुष्टि करना जरूरी है। इसके लिए राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग और चिकित्सा परामर्श समिति की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी देखें। इसके साथ ही कॉलेज से जुड़े अस्पताल में बिस्तरों की संख्या, मरीजों की उपलब्धता, जरूरी जांच सुविधाओं और संबंधित विभाग की स्थिति के बारे में पता करें। स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए केवल कॉलेज का नाम या प्रतिष्ठा देखकर फैसला न करें। यह भी समझें कि वहां आपको अपने चुने हुए विषय में कितना वास्तविक अनुभव मिल सकता है। यह भी पढ़ें: देश के टॉप-10 मेडिकल कॉलेज, ये हैं एमडी-एमएस या डीएनबी के बेहतर विकल्प
 

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NEET PG Counselling 2026 - फोटो : AI Generated

कॉलेज की फीस, छात्रवृत्ति और बांड की शर्तें क्या हैं?

कॉलेज का चुनाव करते समय केवल शिक्षण शुल्क देखकर निर्णय लेना सही नहीं है। छात्रावास, भोजन, परीक्षा, अन्य शुल्क और रहने के खर्च को जोड़कर कुल बजट तैयार करें। सरकारी, निजी और मानद विश्वविद्यालयों के शुल्क में काफी अंतर हो सकता है। इसके अलावा छात्रवृत्ति, वजीफे और शिक्षा ऋण से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी लें। दाखिला लेने से पहले यह भी जांचें कि संबंधित राज्य या संस्थान में सेवा बांड की शर्तें क्या हैं, कितने समय तक सेवा करनी होगी और नियमों का पालन नहीं करने पर कितना जुर्माना देना पड़ सकता है। ये बातें भविष्य में आर्थिक परेशानी से बचा सकती हैं। यह भी पढ़ें: नीट पीजी काउंसलिंग का पंजीकरण करने से पहले समय इन 8 बातों का जरूर रखें ध्यान
 
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NEET PG Counselling 2026 - फोटो : AI Generated

 वजीफा, प्रशिक्षण और छात्रावास की स्थिति कैसे जांचें?

स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रम के दौरान मिलने वाला वजीफा भी कॉलेज चुनने का एक महत्वपूर्ण आधार है। अलग-अलग संस्थानों में इसकी राशि और भुगतान की शर्तें अलग हो सकती हैं। इसलिए दाखिले से पहले संबंधित कॉलेज की आधिकारिक जानकारी जांचें। साथ ही छात्रावास, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं के बारे में पता करें। वर्तमान छात्रों और पूर्व छात्रों से बातचीत करके पढ़ाई के माहौल, काम के दबाव और विभाग में मिलने वाले प्रशिक्षण की जानकारी भी जुटाई जा सकती है। केवल अधिक वजीफा मिलने के आधार पर कॉलेज चुनने के बजाय सभी सुविधाओं की तुलना करना बेहतर है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

 चॉइस फिलिंग में किन गलतियों से बचें?

नीट पीजी काउंसलिंग 2026 के पहले चरण के लिए चिकित्सा परामर्श समिति ने 12 अक्टूबर से पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार विकल्प भरने की प्रक्रिया 13 से 22 अक्टूबर तक निर्धारित है। अभ्यर्थियों को अंतिम समय का इंतजार करने के बजाय समय रहते अपनी प्राथमिकता सूची तैयार करनी चाहिए। 
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