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National Vaccination Day 2021: जानिए क्या है देश में टीकाकरण का इतिहास और इसका महत्व

Tue, 16 Mar 2021 09:07 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस - फोटो : Amar Ujala Graphics
वर्ष 2021 की शुरुआत से ही बच्चों से लेकर वृद्धजनों तक टीकाकरण यानी वैक्सीनेशन के बारे में सबने पढ़ा और सुना होगा। बीते साल की शुरुआत से ही चरम पर रही कोरोना महामारी के भयावह प्रकोप का खतरा सबको डराता रहा। हालांकि, इस साल सबको इस बात से राहत मिली है कि अब कोविड-19 महामारी के खिलाफ वैक्सीन बन चुकी है। साथ ही दुनियाभर में टीकाकरण अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। लेकिन बहुत कम लोग जानते होंगे कि देश में प्रत्येक वर्ष 16 मार्च के दिन नेशनल वैक्सीनेशन/ इम्यूनिजेशन डे यानी राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया जाता है।

ऐसा देश में 1995 से लगातार हो रहा है। राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस (National Vaccination या Immunization Day) यह पहली बार 1995 में ही मनाया गया था। उसी दिन देश में राष्ट्रीय पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था। इस अभियान के कारण ही देश में पोलियो का प्रसार थम पाया है। इस बार कोरोना महामारी के प्रसार की शृंखला तोड़ने के लिए कोविड-19 के टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। इससे इस वर्ष राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस का महत्व और अहम हो गया है।

कोविड टीकाकरण के तहत भारत में अब तक तीन करोड़ से अधिक लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है। वर्तमान में, कोविड टीकाकरण अभियान के दूसरे चरण में है 45 से 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों को वैक्सीन दी जा रही है। आइए अगली स्लाइड्स में जानते हैं क्या है टीकाकरण, भारत में राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस का इतिहास और टीकाकरण का महत्व ...  
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राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 2021 : polio vaccine
क्या है टीकाकरण
विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ के अनुसार, टीकाकरण (Vaccination / immunization) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले विकार या वायरस के खिलाफ मजबूत हो जाती है।

टीका शरीर में मौजूद रक्त में घुलने के बाद स्वास्थ्य प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी बनाते हुए बाहरी आक्रमण यानी वायरस के हमलों से सुरक्षित बनाने में मदद करता है। टीकाकरण के बाद एंटीबॉडी बनने से वायरस या बैक्टीरिया जैसे कीटाणु कमजोर हो जाते हैं या खत्म हो जाते हैं या कमजोर कर देते हैं। जिससे व्यक्ति बीमारी का शिकार नहीं बन सकते हैं।
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राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस - फोटो : Amar Ujala Graphics
टीकाकरण दिवस का इतिहास
देश में पहली बार राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 16 मार्च, 1995 को मनाया गया था। उस दिन देश में ओरल पोलियो वैक्सीन की पहली खुराक दी गई थी। देश में विकलांगता की जनक मानी जानी वाली पोलियो महामारी को खत्म करने के लिए भारत सरकार द्वारा पल्स पोलियो अभियान (Pulse Polio Campaign) की शुरुआत की गई थी।
पिछले कुछ दशकों में टीटनस, पोलियो, टीबी जैसी घातक बीमारियों से लड़ने के लिए टीके एक अभिन्न हथियार के तौर पर उभरे हैं और इनके कारण लाखों लोगों की जिंदगियां बचाई जा सकीं हैं। 

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राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 2021 : Polio Vaccine - फोटो : iStock
पल्स पोलियो अभियान 
पल्स पोलियो अभियान के तहत, देश में पांच वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों को ओरल पोलियो वैक्सीन की दो बूंदें दी गई थीं। इसके लिए एक नारा दो बूंद जिंदगी की काफी लोकप्रिय हुआ था। गांव-गांव, शहर-शहर स्वास्थ्य विभाग और सामाजिक संगठनों की टीम घर-घर जाकर, स्कूल, बस अड्डे, रेलवे स्टेशन आदि स्थानों पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाते थे। इन प्रयासों के कारण ही 2014 में भारत को पोलियो मुक्त घोषित किया गया था। 
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राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस 2021 : Covid-19 Vaccination Drive - फोटो : अमर उजाला।
टीकाकरण दिवस का महत्व
वर्तमान दौर में टीकाकरण के महत्व को कमतर नहीं आंका जा सकता है। इंसानों को ज्ञात गंभीर और घातक बीमारियों या महामारियों से बचाने के लिए टीकाकरण ही सबसे प्रभावी उपाय है। भारत में पोलियो उन्मूलन इसका ज्वलंत उदाहरण है।

हाल ही में वैश्विक संक्रामक महामारी कोविड-19 के खिलाफ दुनियाभर में टीकाकरण की शुरुआत हुई है। इससे पहले भी दुनियाभर में व्यापक टीकाकरण अभियानों के परिणामस्वरूप दुनिया के प्रमुख हिस्सों से चेचक, खसरा, टिटनस जैसे अत्यधिक संक्रामक और खतरनाक बीमारियों का खात्मा हुआ है। 
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