पिछले कई दिनों में हमारे देश में प्रदूषण को लेकर बहुत शोर मचा है। अक्सर हवा खराब होने और सांस लेना दूभर होने की शिकायतें मिल रही हैं। इस दौरान एक शब्द का इस्तेमाल बार-बार किया जा रहा है, जिसे आप सभी ने सुना ही होगा। वो है PM 2.5 (पार्टिकुलेट मैटर 2.5)।
ये वो छोटे-छोटे कण होते हैं, जिनकी वजह से प्रदूषण होता है। इनका आकार 2.5 माइक्रोमीटर होता है। कहा जाता है कि ये हमारे फेफड़ों से होते हुए हमारे खून की नली तक पहुंच जाते हैं। लेकिन, हकीकत ये है कि इनमें से जयादातर प्रदूषण के कण फेफड़ों की छननी के पार नहीं जा पाते।
हमें ये भी बताया जा रहा है कि नाइट्रस ऑक्साइड गैसें, जिसमें नाइट्रोजन ऑक्साइड भी शामिल है, वो ही शहरों में वायु प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं। लेकिन, रिसर्च बताती हैं कि यूरोप में प्रदूषण से होने वाली मौतों में से केवल 14 प्रतिशत के लिए ही नाइट्रस ऑक्साइड गैसें जिम्मेदार होती हैं।
वायु प्रदूषण के असल जिम्मेदार