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Self-Awareness: क्या आप जानते हैं माफी कब और क्यों मांगनी चाहिए? जानिए इसके पीछे की भावनात्मक समझ

Thu, 07 Aug 2025 09:38 AM IST
शाहीन परवीन मार्क गॉलस्टन, हार्वर्ड बिजनेस रिव्यू

सार

Apology: माफी कब मांगनी चाहिए, यह जानना बहुत जरूरी होता है। सही समय पर माफी मांगने से न सिर्फ आपकी गलती स्वीकार होती है, बल्कि इससे यह भी जाहिर होता है कि आप एक समझदार और संवेदनशील इंसान हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik
Forgiveness: किसी से माफी मांगना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील इन्सान होने का संकेत भी है। माफी कब और कैसे मांगी जाए, यह जानना उत्तना ही जरूरी है, जितना कि माफी मांगना। अगर आपको एहसास हो कि आपकी किसी बात या व्यवहार ने जानबूझकर या अनजाने में किसी को दुख पहुंचाया है, तो माफी मांगकर हालात को स्पष्ट करना आपको परिपक्वता को दर्शाता है। 

इससे आप अपनी गलती स्वीकार करते हैं और साथ ही यह भी साबित करते हैं कि आपकी सोच सकारात्मक और संजीदा है। हालांकि, यदि आपको लगता है कि सामने बाला व्यक्ति अनुचित व्यवहार कर रहा है, तो पहले उससे बातचीत करें और उसके बाद तय करें कि माफी मांगना जरूरी है या नहीं। ऐसे में किसी से माफी मांगने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

जिम्मेदारी लेना सीखें

गलतियों की जिम्मेदारी लेना सीखें। उदाहरण के लिए आप जिससे माफी मांगना चाहते हैं उससे कह सकते हैं कि आपके वक्त पर या सही ढंग से काम नहीं करने के कारण मैंने आप पर गुस्सा किया। आपके साथ मुझे ऐसा वर्ताव नहीं करना चाहिए था। इसके लिए मुझे सखेद है। बहुत से लोग यह भी सलाह देते हैं कि गलती न स्वीकारें, ताकि कोई उसका अनुचित लाभ न उठा सके। हालांकि, सच यह है कि जब आप सीमित, स्पष्ट व सटीक शब्दों में माफी मांगते हैं, तो आप मजबूत और ईमानदार व्यक्तित्व का परिचय देते हैं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

दूसरों की भावनाओं को समझें 

माफी मांगते समय यह दिखाएं कि आपको एहसास है कि आपके व्यवहार का उन पर क्या असर पड़ा। उनसे कहें कि मुझे लगता है कि मेरे इस रुख ने आपको चिंता में डाल दिया होगा, जिसके लिए मुझे अफसोस है। यह अनुमान लगाने की कोशिश कतई न करें कि वे क्या सोच रहे हैं, बल्कि खुद को उनकी स्थिति में रखकर सोचें। यह आपसी सहानुभूति की बुनियाद है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepik

विश्वास दिलाएं

स्पष्ट करें कि आप अपनी गलती दोहराएंगे नहीं। उन्हें बताएं कि यदि अगली बार ऐसी कोई स्थिति आएगी, तो आप पहले खुद से विचार करेंगे और शांतिपूर्वक तरीके से पेश आएंगे। इससे सामने वाले के मन में भरोसा पैदा होता है कि आप वास्तव में अपनी गलतियां सुधारना चाहते हैं और हर बार माफी मांगने तक सीमित नहीं रहना चाहते। 

अंत में, किसी दरार को पूरी तरह से पाटने के लिए, अनकही बात को भी खुलकर कहना जरूरी है। इसलिए, अगर आप वाकई किसी रिश्ते को सुधारना चाहते हैं, तो जरूरी है कि सामान्य शब्द नहीं, बल्कि अनकही बातों को भी ईमानदारी और खुलेपन से साझा करें। इससे आपके संबंध मजबूत और सकारात्मक तो होंगे ही, रिश्तों के प्रति आपकी जिम्मेदारी भी झलकती है।
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