shekinah mukhiya
कितनी खुश हैं शिकायना
ये तो थी दाखिले के पहले की उसकी राय। लेकिन एडमिशन के बाद क्या उनके मूड स्विंग भी हुए? इस पर विनोद कहते हैं, 'पहले कुछ दिन तो स्कूल से आने के बाद हम रोज उससे स्कूल कैसा रहा इस बारे में पूछते थे। लेकिन हर बार उसकी चेहरे की खुशी बताती थी कि हमारा फैसला सही है। वो किसी दवाब में नहीं है।' शिकायना को स्कूल में पढ़ते हुए दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। क्या कभी माता-पिता या फिर शिकायना के जहन में इस दौरान स्कूल बदलने का ख्याल आया। इस पर शिकायना के पिता कहते हैं, 'मैं हर फैसले में इसके साथ हूं। आप खुद ही उससे पूछ लीजिए।'
लेकिन सवाल पूछने से पहले शिकायना कहती हैं, टस्कूल में पढ़ने जाते हैं, यहां से अच्छी पढ़ाई कहीं नहीं हो सकती।' शिकायना के दाखिले पर स्कूल के हेडमास्टर एस के त्यागी से भी हमने बात की। क्लास में अकेली लड़की को पढ़ाने में क्या कभी कोई दिक्कत आई। इस पर उनका कहना है, 'स्कूल रेसिडेंशियल है। लेकिन शिकायना अपने माता-पिता के साथ रहती है। इसलिए किसी तरह कि दिक्कत हमें नहीं आई।' अच्छा ये है कि शिकायना के आने के बाद एक और टीचर ने अपनी बच्ची के लिए ऐसी ही गुजारिश की है। उम्मीद है कि शिकायना को जल्द ही अपनी एक दोस्त मिल जाएगी।