आईटी सेक्टर में काम करने वाले 33 प्रतिशत युवाओं ने खुद से कोडिंग सीखी है। देशभर के 1500 युवाओं के बीच हुए सर्वे में यह बात सामने आई है। ये युवा वेब, सॉफ्टवेयर और एप डेवलपर्स हैं। सर्वे आईआईटी कानपुर के छात्रों ने किया है।
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सर्वे करने वाले आईआईटी कानपुर के इंडस्ट्रियल एंड मैनेजमेंट इंजीनियरिंग के छात्र प्रदीप गंगवानी और सुदीप्तो सेन ने बताया कि देशभर की कंपनियों में सर्वे फार्म ऑनलाइन भेज दिया गया था। इसके बाद 1500 युवाओं से इनपुट लिया गया। इसमेें सामने आया कि 495 डेवलपर्स ऐसे थे, जिन्होंने यू-ट्यूब व अन्य कोडिंग साइट्स जैसे गिटहब, स्टैक ओवरफ्लो, उडेमी, उडासिटी, कोर्सेरा, प्लूरलसाइट, लिंडा आदि से ऑनलाइन कोडिंग सीखी है।
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खास बात है कि इसमें करीब 14 फीसदी ऐसे थे, जो 14 वर्ष की उम्र से ही कोडिंग सीखने लगे थे। करीब 60 फीसदी ने 20 वर्ष की आयु के बाद से कोडिंग सीखनी शुरू की। ऐसे युवा जो आईटी के अच्छे जानकार होते हैं, वे नौकरियों के मामले में काफी आगे होते हैं। अमेजन, लिंक्डइन, क्वोरा, फेसबुक जैसी बड़ी कंपनियां भी ऐसे युवाओं पर नअर बनाए रखती हैं।
रोजाना 20 लाख लोग सर्च करते हैं कोडिंग
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आईआईटी कानपुर के कंप्यूटर साइंस के प्रोफेसर डॉ. संदीप शुक्ला बताते हैं कि जो बच्चे शुरुआत से ही कंप्यूटर पर काम करने लगते हैं, वे खुद से ही कई बातों को समझने के लिए उत्साहित रहते हैं। दुनिया भर में रोजाना 20 लाख लोग ऑनलाइन कोडिंग सीखने के लिए गूगल करते हैं।
कोडिंग वह लैंग्वेज है, जिसका कंप्यूटर प्रोग्रामिंग में आवश्यक रूप से इस्तेमाल होता है। सॉफ्टवेयर, वेबसाइट और एप तैयार करने में कोडिंग का ही इस्तेमाल होता है। कोडिंग में कई लैंग्वेज का इस्तेमाल होता है। उदाहरण के तौर पर अगर वेबसाइट तैयार करनी है तो एचटीएमएल, सीएसएस, पीएचपी जैसी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज पर कोडिंग की जाती है।