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मोदी बोले- भारत व अमेरिका को स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर गर्व, जानें इनकी खासियतें

Mon, 24 Feb 2020 03:18 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी - फोटो : Amar Ujala
Statue of Unity Vs Statue of Liberty: दुनिया में कई ऐसे निर्माण हुए हैं जिन्हें देखकर लोग आश्चर्य करते हैं। जिन्हें बनाने वाले की तारीख किए बिना मन रह नहीं पाता। न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी और गुजरात की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भी इन्हीं खूबसूरत निर्माणों में से एक हैं। अपने भारत दौरे के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सोमवार, 24 फरवरी को गुजरात में अपने भाषण के दौरान स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तारीफ की।

इस मौके पर ट्रंप का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा कि दोनों देशों के बीच विविधता एक मजबूत रिश्ते का आधार है। एक देश के पास स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी है तो दूसरे के पास स्टैच्यू ऑफ यूनिटी। दोनों को इनपर गर्व है।



यहां हम आपको बता रहे हैं कि दुनिया की इन दो बेहद खास प्रतिमाओं के बारे में। दोनों की खासियतों के बारे में। 
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पीएम मोदी(फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
  • स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इसकी लंबाई 182 मीटर है। इस प्रतिमा को भारत के कारीगरों ने सिर्फ 33 महीनों में बना दिया।
  • जबकि न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को बनाने में करीब 10 साल का समय लगा था। 18 अक्तूबर 1886 में इसका अनावरण हुआ था। इस प्रतिमा की ऊंचाई 93 मीटर है।
  • भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी एकता का संदेश देती है। वहीं, स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी दुनिया को स्वतंत्रता और लोकतंत्र का संदेश देती है।
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Statue of unity - फोटो : PMO

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

  • इस प्रतिमा की ऊंचाई 182 मीटर रखने का फैसला किया गया क्योंकि गुजरात में इतने ही विधानसभा क्षेत्र हैं।
  • इसे बनाने में करीब 3400 मजदूर लगे थे। यह प्रतिमा गुजरात में नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध के नजदीक बनाई गई है।
  • 2010 में नरेंद्र मोदी ने पहली बार इस परियोजना की घोषणा की थी। तब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे। 

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स्टेच्यू ऑफ यूनिटी
  • इस प्रतिमा को भारतीय शिल्पकार राम वी. सुतार ने डिजाइन किया है। 31 अक्तूबर 2018 सरदार पटेल की 143वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का अनावरण किया था।
  • 135 मेट्रिक टन बेकार पड़े लोहे को इकट्ठा कर, उसमें से करीब 109 टन काम के लायक लोहा निकाला गया, जिससे यह प्रतिमा तैयार की गई है।
  • इस प्रतिमा के बारे में इसे डिजाइन करने वाले राम वी. सुतार के बेटे अनिल सुतार का कहना है कि 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका पोश्चर सम्मान, विश्वास, लोहे के समान अडिग निश्चय और करुणा दर्शाती है। वो चीजें जो सरदार पटेल के व्यक्तित्व में थीं।'
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statue of liberty

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी

  • इस प्रतिमा के निर्माण के लिए अमेरिका और फ्रांस ने मिलकर फंड दिया था। हालांकि कहा ये भी जाता है कि ये प्रतिमा अमेरिका को फ्रांसीसियों ने तोहफे के रूप में दिया था।
  • इसे फ्रांस के ही सिविल इंजीनियर गस्तावे एफिल ने बनाया था। अखबार के प्रकाशक जोसेफ पुलित्जर ने इस प्रतिमा के निर्माण में मदद के लिए एक क्राउड फंडिंग अभियान चलाकर एक लाख डॉलर (वर्तमान के अनुसार करीब 72 लाख रुपये) से ज्यादा राशि इकट्ठा की थी।
  • ये प्रतिमा रोमन देवी की है जो स्वतंत्रता दर्शाती है। प्रतिमा का दाहिना हाथ ऊपर की ओर है जिसमें एक मशाल है। जबकि बाएं हाथ में टैबुला अंसाटा (टैबलेट) है जिसपर रोमन लिपि में अमेरिका की स्वतंत्रता की तारीख (जुलाई 4, 1776) लिखी है।
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स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी
  • इस प्रतिमा के पैरों में टूटी हुई जंजीर है और एक कदम को आगे की ओर बढ़ता हुआ दर्शाया गया है, जैसे वह गुलामी की जंजीर तोड़कर आजाद हो गई हो।
  • स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की आंतरिक संरचना लोहे की है और बाहर से यह तांबे से बनाई गई है।
  • स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को 1884 में फ्रांस में ही तैयार किया गया था। 1885 में प्रतिमा को न्यूयॉर्क लाकर स्थापित किया गया था।
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