अच्छा बॉस सबको चाहिए। हर शख़्स किसी अच्छे बॉस के साथ काम करना चाहता है। लेकिन क्या एक अच्छा बॉस आपकी तरक़्की के लिए फ़ायदेमंद हो सकता है? यह एक बड़ा सवाल है। चलिए, सबसे पहले जान लेते हैं अच्छे बॉस की परिभाषा क्या है? अच्छा बॉस वो है जो आपकी इज़्ज़त करे, आपकी हर बात माने, औऱ आपको प्रोफेशनली आगे बढ़ने का मौक़ा दे।
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- फोटो : Getty Images
वहीं, कुछ बॉस ऐसे भी होते हैं जो काम के मामले में आपको हर रोज़ एक नई चुनौती देते हैं। वो आपकी शिकायतें, गिले-शिकवे भी सुनते हैं, साथ ही आपकी कमी बताने में भी कोई परहेज़ नहीं करते। ऐसे बॉस को अक्सर लोग तानाशाह कहते हैं।
अगर आप अपने पेशे में तरक़्क़ी करना चाहते हैं तो ऐसे तानाशाह बॉस ही आपके लिए बेहतर हैं। ऐसे बहुत से बॉस देखे गए हैं जो बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं, वो अच्छी परफोर्मेंस की बात भी करते हैं। लेकिन, साथ ही उनके मन में कहीं भीतर यह भाव रहता है कि कर्मचारी उनकी इज़्ज़त में कमी ना कर दें। वो सबके साथ एक दोस्ताना ताल्लुक़ात रखना चाहते हैं।
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ऐसे बॉस को हमेशा डर लगा रहता है कि अगर उसने अपने किसी स्टाफ़ को कोई ऐसा काम सौंप दिया जो उसके बस का ना हो तो वह उससे नाराज़ हो जाएगा और इज़्ज़त करना कम ना कर देगा। ऐसे में वे किसी भी कर्मचारी को काम का कोई बड़ा चैलेंज नहीं दे पाते।
ऐसे टीम लीडर के होते हुए कर्मचारी भी अपनी प्रतिभा को पहचान नहीं पाते। किसी कर्मचारी को अपनी क्षमताओं का समझने का मौका तभी मिलता है जब उसके सामने कोई चुनौती होती है। ऐसे में आपका अच्छा बॉस आपके लिए घातक साबित होता है।
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असल में अच्छा बॉस वही है, जिसे अपने पसंद किया जाने या ना किये जाने की चिंता ना हो। उसकी नज़र सिर्फ काम के नतीजे पर होती है। उसे इस बात से सरोकार नहीं होता कि आपने काम कैसे किया है। खुद उसके मंज़िल, उसके टारगेट ऊंचे होते हैं। तभी वो अपने स्टाफ़ को भी बड़े चैलेंज दे पाता है।
ऐसे बॉस अपने क़ायदे-क़ानून के भी पक्के होते हैं। कुछ मुलाज़िम ऐसे बॉस को हो सकता है, वक़्ती तौर पर पसंद ना करें। लेकिन दिल में उसके लिए इज़्ज़त हमेशा रहती है। असल में लोग उसके काम करने के तरीक़े और उसके काम की इज़्ज़त करते हैं।
अपने स्टाफ़ से सख़्ती से काम लेना और मज़बूत इरादों वाला बॉस होना कोई गुनाह नहीं है।
लेकिन ज़्यादातर बॉस अपने मातहतों के दरमियान अपनी अच्छी पहचान बनाए रखना चाहते हैं, जो एक तरह की बीमारी भी है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि कही आपको यह बीमारी नहीं लग गई तो ज़रा इन सवालों पर ग़ौर फरमाइये।
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क्या पिछले एक साल में ऐसा हुआ है कि कोई जूनियर आपकी उम्मीदों पर खरा ना उतरा हो तो आपने उससे अपनी अपेक्षाएं ही बदल दी हों?
क्या पिछले एक साल में आपने अपने किसी कर्मचारी को उसके खराब रवैये की वजह से डांटा फटकारा हो?
क्या ऐसा हुआ है कि कोई मुलाज़िम बहुत मेहनत के बाद भी अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया। फिर भी आपने उसकी मेहनत की तारीफ़ की है। उसे इनाम के तौर पर कुछ बोनस दिया है?
क्या आपने अपने स्टाफ़ के लिए डेडलाइन के साथ कुछ मुश्किल टारगेट रखे हैं? लक्ष्य भी ऐसे जिनका नतीजा साफ़ तौर पर नज़र आए।
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क्या कभी ऐसा हुआ है कि आपने किसी मुलाज़िम को उसकी कमियों के लिए सिर्फ़ इस डर से नहीं डांटा कि कही वह टीम में अलग-थलग ना पड़ जाए?
कहीं आप अपने कर्मचरियों की कमियां बताने में किसी तरह का लिहाज़ करते हैं?
क्या आपके स्टाफ़ को ऐसा लगता है कि वो आपको किसी भी बात के लिए आसानी से मना सकते हैं?
क्या आपके किसी कर्मचारी के मन में यह भावना है कि कभी वो आपकी अपेक्षाओं पर खतरा उतरा था?
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अब वो जब तक आपके साथ काम करेगा, उसी कामयाबी को भुनाता रहेगा या कोई नया चैलेंज लेकर फिर से अपनी प्रतिभा को मनवाएगा?
अगर इन सवालों में तीन या उससे ज़्यादा के लिए आपका जवाब हां में हैं, तो साहब समझ लीजिए, कि आप अच्छा बॉस कहलाने की बीमारी के शिकार हैं।
अगर आप चाहते हैं कि आपका स्टाफ आपको सिर्फ पसंद ही ना करे बल्कि आपकी इज़्ज़त भी करे, तो वक़्त समय आ गया है कि एक बॉस के तौर पर आप खुद में कुछ बदलाव लाएं।
सबसे पहले तो हर कर्मचारी को उसकी क़ाबिलियत के मुताबिक़ काम सौंपें। काम की प्रगति मापने के लिए एक लॉग बुक तैयार करें जिसमें हर कर्मचारी के काम और उसकी तरक्क़ी का लेखा जोखा हो।
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इस बात पर नज़र रखना बहुत ज़रूरी है कि हर कर्मचारी अपनी 'डेडलाइन' तक अपना लक्ष्य पूरा कर पा रहा है या नहीं। इस गला काट मुक़ाबले के दौर में काम तय समय पर होना लाज़मी है।
अपने मातहत कर्मचारियों के काम में यह भी देखिए कि उसने कितने जोश से अपना काम किया है। अगर वो इसके बावजूद नाकाम हुआ है तो उसकी नाकामी का ढिंढोरा मत पीटिए। उसकी लगन और मेहनत की तारीफ़ करते हुए उसकी हौसला आफ़ज़ाई कीजिए।
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समय समय पर सभी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां भी बदलते रहने से उन्हें नए मौक़े मिलेंगे। हो सकता है, कुछ लोग उसके लिए तैयार ना हों। लेकिन, यही उनके लिए एक चैलेंज है।
किसी भी तरह के पेशे में भावनाओं की कोई जगह नहीं होती। अगर किसी ने कोई काम ठीक नहीं किया है या समय पर पूरा नहीं किया है तो उस कर्मचारी को उसकी गलती और कमी बताने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए।
इस बात का ख़याल रहे कि उसकी बेइज़्ज़ती आप ना करें। लेकिन, उसे अच्छी तरह समझ आ जाए कि उससे गलती हुई है और उसे आगे इस बात का ख़ास ख्याल रखना है।
अच्छा काम करने वाले कर्मचारियों को उनकी मेहनत का इनाम देने में कोई गुरेज़ नहीं होना चाहिए। इससे अच्छा काम करने वाले कर्मचारी का हौसला तो बढ़ता ही है। दूसरे कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ता है। इसका सीधा असर काम के रूप में देखने को मिलता है।
अच्छा बॉस एक इंसान के तौर पर पसंद किया जा सकता है। लेकिन, वो काम के मामले में अच्छे नतीजे नहीं दे सकता।
वहीं, एक डिमांडिंग बॉस ना सिर्फ काम अच्छा ले सकता है, बल्कि अपने साथ करने वाले साथियों को भी आगे बढ़ने में मदद कर सकता है और इज़्ज़त भी कमा सकता है।
अगर आप एक डिमांडिग बॉस के साथ काम ना करके सिर्फ एक अच्छे बॉस के साथ काम करते हैं तो आप फिर एक ठहरे हुए पानी की तरह से हो जाएंगे।
बिज़नेस की दुनिया में मुक़ाबले करने वाले बहुत हैं, मुक़ाबले का यह चैलेंज आपके सामने कभी भी कहीं भी किसी भी दिशा से आ सकता है। सिर्फ अच्छी बातों से काम चलने वाला नहीं है।