एक बड़ी कार्य चुनौती का संचालन
संक्षेप में; यूपी बोर्ड 2018 के परिणाम की तैयारी और घोषणा बोर्ड के अधिकारियों के लिए बड़ी चुनौती बनती है जिसकी वजह जांचकर्ताओं की भारी संख्यात्मक ताकत है। एक अनुमान से पता चलता है कि कक्षा 10वीं की परीक्षा में 37,12,508 और 12वीं कक्षा की परीक्षा में 37,17,032 छात्रों ने पंजीकरण किया।
शुरुआत में लगभग 67, 29, 540 छात्रों ने पंजीकरण किया किन्तु धोखाधड़ी के मामलों पर भारी कार्रवाई की वजह से इनमें से 10 लाख छात्रों की संख्या काम हो गई थी। फिर भी संख्या पर्याप्त थी और परीक्षा आयोजित करना; दस्तावेजों का मूल्यांकन, उचित सारणी, और परिणाम घोषणा प्राधिकरण के लिए सभी बड़ी चुनौतियां हैं।
यह काफी स्पष्ट है कि बोर्ड 2019 में 2017 के अनुभव को दोहराना नहीं चाहता है। वर्ष 2017 में बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षाओं के परिणामों की घोषणा में 20 दिन की देरी हुई और परिणाम सामने आए जून 2017 के 9वें दिन तक। इस वर्ष बोर्ड का लक्ष्य तुलना में बहुत तेजी से घोषणा करना है।