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ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के सिल्वर जुबली समारोह का उद्घाटन, गढ़वाली संस्कृति के कई रंग खिले

Tue, 26 Sep 2017 09:36 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी
नई उमंग और जोश के साथ आज ग्राफिक एरा के सिल्वर जुबली समारोह का श्रीगणेश हो गया। सिल्वर जुबली समारोह में टेक्नोलॉजी के नए बदलावों को अपनाने के बाद अब दुनिया के सौ सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में शामिल होने के लिए पूरी क्षमता से जुटने का संकल्प किया गया। मुख्य अतिथि के रूप में प्रख्यात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी ने समारोह का उद्घाटन करते हुए उत्तराखंड के विकास और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में शानदार कीर्तिमानों के लिए ग्राफिक एरा की सराहना की। श्री नेगी के साथ ही ग्राफिक एरा के मुख्य संरक्षक श्री आर सी घनशाला, गवर्निंग बॉडी की सदस्य श्रीमती लक्ष्मी घनशाला, चांसलर डॉ. आर सी जोशी, कुलपति डॉ एल एम एस पालनी और ग्राफिक एरा हिल के कुलपति डॉ संजय जसोला ने दीप प्रज्ज्वलित किए।
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ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के सिल्वर जुबली समारोह के मौके पर मौजूद सारे गणमान्य व्यक्तियों ने मिलकर हजारों रंग बिरंगे गुब्बारों को आकाश में इंद्रधनुष जैसा बना दिया, एवं हर्ष व उल्लास के साथ इस भव्य कार्यक्रम का आरम्भ किया ।
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इसके साथ ही लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी जी ने ग्राफिक एरा के संस्थापक डॉ. कमल घनशाला के 25 वर्षों के परिश्रम और लगन का उल्लेख करते हुए कहा कि आज के इस संघर्ष भरे युग में उच्च स्तरीय दो विश्वविद्यालय श्री घनशाला जी के परिश्रम और सफलता का ही सुपरिणाम हैं। हर साल तकनीकी और मैनेजमेंट की शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करके डॉ. कमल घनशाला ने लोगों को आत्मनिर्भरता की नयी राह दिखाई है। हर साल हजारों छात्र-छात्राओं का भविष्य संवारना और उन्हें दुनिया में सम्मान के साथ अपनी जगह बनाने लायक बनाना किसी तपस्या से कम नहीं है।

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समारोह में ग्राफिक एरा ग्रुप के अध्यक्ष डॉ कमल घनशाला ने ग्राफिक एरा के 25 साल के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि आज यह संस्थान 150 साल पुरानी शैक्षिणिक संस्थाओं से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। ग्राफिक एरा को दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालयों में शामिल कराने का उद्घोष करते हुए डॉ घनशाला ने कहा कि इसके लिए 200 प्रतिशत अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कामयाबी के इस सफर में योगदान देने वाली विभूतियों को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड समेत देश और विदेश के हजारों अभिभावकों के भरोसे पर खरा उतरने की कोशिशों ने ग्राफिक एरा को कामयाबी की नई उम्मीदों का प्रतीक बना दिया है।
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इसके बाद देर शाम आयोजित रंगारंग समारोह में गढ़वाली और कुमाऊंनी संस्कृति के कई मोहक रंग नजर आये। रंगारंग कार्यक्रम की शुरूआत प्रख्यात लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के लिखे मांगल – दैणा होया खोली का गणेशा रे, देणा होया मोरी का नारायणा... के साथ हुई। श्री नेगी के गढ़वाली गीतों पर कलाकारों ने अपने सधे हुए अंदाज में एक के बाद एक लोकनृत्य पेश करके हजारों युवाओं को नाचने पर मजबूर कर दिया। अंधेरा घिरने के साथ ही थिरकते कदमों की रफ्तार तेज होती चली गई। बारिश से गीला हो चुका मैदान भी युवाओं के जोश में बाधक नहीं बन सका।
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इस पूरे रंगारंग कार्यक्रम में जोश एवं उत्साह बढ़ने के लिए लोकगायिका अनुराधा निराला ने भी श्री नेगी के गीतों को अपनी आवाज दी। उन्होंने – मुल मुल केकु हैसणी छे तू, हे कुलेकी डाली, कखी तिन मेरी आख्यों का सुपनया देखि याली... पर खूब तालियां बटोरी। लोक गायक बिशन हरियाला के कुमाऊंनी गानों ने भी युवाओं को खूब नचाया। उनका गाना- कैलै बजे मुरूली बैणा ऊची निशी डान्डयूमा... भी बहुत पसंद किया गया। समारोह में कई गढ़वाली और कुमाऊंनी लोकनृत्य बहुत पसंद किए गए। प्रसिद्ध गायक अनिल बिष्ट का गढ़वाली गीत भी खूब जमा- हुंगरा लगांद भग्यानी नाकैकी नाथुली । 
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तेजी से लोकप्रियता की डगर पर बढ़ाते युवा कवि कविलास नेगी ने – द्वी गती बैशाख सुर्मा मेरा मुलुक मेला, मेरा मुलुक मेला ऐ जई...सुनाकर युवाओं को देर तक नचाया। समारोह में ऊषा नेगी. मिनाक्षी मनियारी, रोशनी नेगी, प्रमेंद्र सिंह नेगी, प्रेम वल्लभ पंत, कविता रावत और राकेश मन्द्रवाल के गीतों ने नाचते युवाओं के कदमों की रफ्तार बढ़ा दी। अशोक रावत, दुर्गा सागर, सोहन चौहान, दीपक बिष्ट, आरती सकलानी, पूजा मंदराल, रीता उनियाल, शैलेंद्र पटवाल, मिनी उनियाल ने नृत्य किया। कार्यक्रम का संचालन गणेश खुगशाल गणी ने अपने चिर परिचित अंदाज में लोगों को हंसाते हुए किया। 
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सिल्वर जुबली समारोह में ग्राफिक एरा के 1994 के पहले बैच के छात्र रहे सलिल दास और ग्राफिक एरा इंस्टीट्यूट के पहले छात्र सचिन घई ने अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर शुरूआती दौर से ग्राफिक एरा में कार्यरत श्री चैत सिंह भंडारी, पी सी बड़थ्वाल, अरविंद पुजारी, राजकमल जोशी, प्रवीण कुमार, अनिल कुमार चौहान, साकेत चतुर्वेदी, दिलीप सिंह रावत समेत 41 कर्मचारियों और अधिकारियों को सम्मानित किया गया। इसके बाद डॉ. कमल घनशाला और पदाधिकारियों ने एक विशाल केक काटा। समारोह के बाद छात्रों के मनोरंजन के लिए डी. जे. की धुनों पर छात्रों के नाचने का सिलसिला शुरू हो गया। 

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