इंटरनेट और सूचना तकनीक की जानकारी रखने वाले युवाओं के लिए फैक्ट चेकिंग क्षेत्र में भी करियर बनाने और रोजगार के सुनहरे अवसर मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं बढ़ने के आसार हैं। दरअसल, तकनीक और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रयोग के चलते दुनियाभार में फेक न्यूज अथवा भ्रामक खबरों एवं सूचनाओं की प्रसार बढ़ा है।
इससे निपटने के लिए कई सरकारी संस्थानों, तकनीकी कंपनियों और मीडिया संस्थानों ने अपने यहां फैक्ट चेकिंग विंग और विभाग भी शुरू किए हैं। हाल ही में कोरोना महामारी के प्रसार, बचाव के उपाय, इलाज और वैक्सीन संबंधी कई तरह के दावे भी फैक्ट चेकिंग में झूठे पाए गए थे। वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों में बार-बार दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने फैक्ट चेकिंग और झूठी खबरों का प्रसार रोकने को बड़ी चुनौती माना था।
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Fact Checking, फैक्ट चेकिंग, career
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
गूगल, फेसबुक और ट्विटर ने की थी तैयारी :
इसके अलावा गूगल, फेसबुक और ट्विटर ने अमेरिकी चुनाव से पहले इसके लिए खास टीम बनाकर तैयारी की थी। इसके पीछे एक और अहम वजह थी कि अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप अक्सर अपने विवादित ट्वीट और दावों के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं। चुनाव में धांधली जैसे जुड़े उनके आरोपों को सोशल मीडिया कंपनियां और मीडिया संस्थान अक्सर झूठे बताकर खारिज करते रहे हैं।
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आसान नहीं है फैक्ट चेकिंग :
सोशल मीडिया पर किए जा रहे किसी भी दावे और फोटो या वीडियो पोस्ट की सत्यता की पड़ताल करना इतना भी आसान काम नहीं है। इसके पीछे कड़ी मेहनत और विश्लेषण करने की जरूरत होती है। फैक्ट चेकर्स दावों और वायरल सूचनाओं की तथ्यात्मक जांच करते हुए उनकी प्रमाणिकता की पुष्टि करते हैं।
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जिम्मेदारी पूर्ण अहम पेशा :
डिजिटल दौर में वायरल हो रही खबर, तस्वीर तुरंत सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ सकती है। कई बार इनसे दंगे तक भड़क जाते हैं। ऐसे में इन चुनौतियों से निपटने के लिए फैक्ट चेकिंग एक जिम्मेदारी पूर्ण अहम पेशा बना गया है। इसके कारण बड़ी संख्या में फैक्ट चेकर्स का आवश्यकता बढ़ी है। किसी भी सूचना के बारे में फाइव डब्ल्यू वन एच फॉर्मूले के तहत कसौटी पर परखना जरूरी है। जैसे- व्हाट (क्या), व्हेन (कब), व्हाई (क्यों), व्हेयर (कहां), हू (कौन) और हाउ (कैसे) आदि।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विशेष डिग्री नहीं, ये चीजें जरूरी :
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए किसी विशेष डिग्री की आवश्यकता नहीं है। फैक्ट चेकर बनने के लिए पत्रकारिता, इंग्लिश, सामाजिक विज्ञान में हो तो ज्यादा बेहतर है। हालांकि, हाल ही में कई संस्थानों ने फैक्ट चेकिंग के क्षेत्र में डिप्लोमा और बैचलर डिग्री कोर्स शुरू किए हैं। हां, आपकी रिसर्च में रूचि होना जरूरी है। साथ ही बातचीत का हुनर और गणित की जानकारी के साथ ही डिजिटल दुनिया की समझ बेहतर हो।
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इंटर्नशिप से करें शुरुआत, फ्रीलांस काम भी :
फैक्ट चेकिंग में करियर बनाने के लिए आप बतौर इंर्टन शुरुआत कर सकते हैं। कई सारे मीडिया संस्थान आजकल फैक्ट चेकिंग टीम रखते हैं। इसके अलावा कई बड़ी टेक कंपनियों और न्यूज मैग्जीन में भी अपार अवसर हैं। इंटर्नशिप में आप रिसर्च वर्क के साथ ही फैक्ट चेकिंग का अनुभव ले सकेंगे। भविष्य में बतौर फैक्ट चेकर पार्ट टाइम, फुल टाइम और फ्रीलांस काम कर सकते हैं।
राजनीतिक दलों को भी रहती है जरूरत :
वहीं, राजनीतिक दलों के आईटी सेल भी फैक्ट चेकर और रिसर्चर्स को रखते हैं। कई संस्थान सिर्फ राजनेताओं के दावों, ट्वीट और विज्ञापनों का फैक्ट चेक करने का ही काम करते हैं। इन संस्थानों में शुरुआती तौर पर इंटर्नशिप करके आप अपने करियर को आगे बढ़ा सकते हैं।