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मुंबई का 'वड़ा पाव': 54 साल पहले इस शख्स ने की थी खोज, एक दृश्य से मिला था आइडिया

Thu, 13 Feb 2020 06:22 PM IST
रत्नप्रिया रत्नप्रिया एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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वड़ा पाव - फोटो : Social Media
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मुंबई का नाम आते ही हर किसी के दिमाग में कई अलग-अलग चीजें आती होंगी। लेकिन इनमें से एक वड़ा पाव जरूर होता है। हो भी क्यों नहीं, जब भी मुंबई के खाने की बात आती है, तो वड़ा पाव का नाम सबसे पहले आता है।

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि मुंबई के इस लोकप्रिय डिश की खोज किसने की थी? पहली बार वड़ा पाव कब देखा गया? इसे खोजने वाले को आइडिया कैसे मिला था? ये कहानी दिलचस्प है और इसके बारे में हम आपको आगे बता रहे हैं।
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वड़ा पाव - फोटो : Wiki
  • पाव को बीच से आधा काटकर उसमें हरी मिर्च, प्याज चटपटे मसाले के साथ बेसन के घोल में लपेटकर तली हुई आलू पैटी भरकर झटपट बनने वाली डिश है वड़ा पाव।  मुंबई में चाहे कॉलेज स्टूडेंट हों या फैक्ट्रियों में काम करने वाले लोग या फिर बॉलीवुड स्टार्स, हर किसी को वड़ा पाव से खास लगाव है।  
  • सिर्फ मुंबई ही नहीं, दूसरे शहरों से वहां जाने वाला लगभग हर शख्स एक बार मुंबई के वड़ा पाव का स्वाद जरूर चखता है।
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वड़ा पाव ढूंढने वाले अशोक वैद्य - फोटो : Social Media
  • कहा जाता है कि वड़ा पाव आज से करीब 54 साल पहले खोजा गया था। साल 1966 में मुंबई के ही एक शख्स ने पहली बार ये डिश बनाई थी।
  • उस शख्स का नाम है - अशोक वैद्य। बताया जाता है कि अशोक वैद्य ने मुंबई के दादर रेलवे स्टेशन पर इस नई डिश का पहला स्टॉल लगाया था।

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वड़ा पाव - फोटो : Wiki
  • कुछ सालों बाद 1970 और 1980 के दशक में जब महाराष्ट्र में कई मिल बंद होने लगे, तो यहां काम करने वाले कई लोगों ने राज्य में अलग-अलग जगहों पर वड़ा पाव का स्टॉल लगा लिया।
  • इस काम के लिए उन्हें महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्ट शिवसेना ने प्रोत्साहित किया था, ताकि मजदूरों व कर्मियों की आजीविका चलती रहे।
  • उस समय महाराष्ट्र में दक्षिण भारतीय डिश उडुपी (Udupi) प्रसिद्ध हुआ करती थी। लेकिन दूसरे राज्यों के बदले अपने राज्य की चीजों को बढ़ावा देने के शिवसेना के अभियान के बाद वड़ा पाव ने उडुपी की जगह ले ली।
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vada pav - फोटो : Instagram
हालांकि आलू और पाव यूरोपीय देशों से भारत में आए। 17वीं सदी में पुर्तगाली ये चीजें भारत लेकर आए थे। लेकिन इन चीजों से वड़ा पाव बनाने का तरीका पूरी तरह भारतीय था। इसलिए भी मुंबईवासी इसे अपनी डिश मानत हैं।

बन चुकी है फिल्म
अशोक वैद्य और वड़ा पाव की इस कहानी पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बन चुकी है। 2015 में एक स्थानीय पत्रकार ने ये डॉक्यूमेंट्री बनाई ताकि दुनिया को इनके बारे में बता सकें।

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mumbai local train - फोटो : PTI
कैसे मिला था आइडिया?
  • कहते हैं अशोक वैद्य अक्सर हजारों लोगों को रोज काम के लिए भागदौड़ करते देखा करते थे। समय और पैसे की कमी से ज्यादातर लोगों को नाश्ता-खाना तक नसीब नहीं होता था। इस समस्या का समाधान उन्होंने वड़ा पाव में ढूंढा।
  • ये ऐसी डिश बनी, जो मिनट भर में बन जाती है और लोग इसे कागज में लपेटकर खाते हुए आसानी से सफर भी कर सकते हैं।
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