धर्मांतरण के मामले में यूपी पुलिस की एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए मौलाना उमर गौतम की पत्नी रजिया उमर ने अपने पति को बेकसूर बताया है। उनका कहना है कि पुलिस के पास उनके पति के खिलाफ कोई सबूत नहीं है। जानबूझकर उनको फंसाया जा रहा है। अदालत पर उनको पूरा भरोसा है। यदि उनके पति के खिलाफ सबूत मिले तो उनको सजा जरूर दी जाए। उनके पति ने किसी को धर्म परिवर्तन के लिए नहीं कहा। ज्यादातर लोग शादी करने के लिए अपना धर्म बदलते हैं। मौलाना की संस्था इस्लामिक दावाह सेंटर (आईडीसी) कानूनी प्रक्रिया के बाद ही ऐसे लोगों की मदद करती है। रजिया ने आरोप लगाया कि उनके पति को धोखे से मसूरी बुलाकर गिरफ्तार किया गया है। उनके पति ने आज तक कानून के बाहर कुछ भी नहीं किया है। उमर गौतम की पत्नी रजिया ने आरोप लगाया कि पूरा मामला डासना स्थित देवी मंदिर के पुजारी स्वामी नरसिंहानंद सरस्वती से शुरू हुआ। दरअसल इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाला नागपुर का युवक विपुल विजयवर्गीय अपने साले मोहम्मद कासिफ के साथ स्वामी के पास पहुंचा था। इन्होंने स्वामी को समझाकर इस्लाम को बुरा न कहने के लिए कहा था।
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मौलाना के घर के बाहर तैनात पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
रजिया का आरोप है कि उसके बाद ही यूपी पुलिस एक्टिव हुई। बृहस्पतिवार को पूछताछ के बहाने पहले उमर गौतम को मसूरी थाने बुलाया गया। वहां देर रात को उनका मोबाइल जमाकर छोड़ दिया गया। बाद में बुलाने पर दोबारा आने के लिए कहा गया। शनिवार को उमर से पासपोर्ट, अकाउंट की डिटेल व पासबुक मंगाई गई। इसके बाद परिवार को बिना सूचना दिए उनको लखनऊ ले जाया गया।
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मुफ्ती जहांगीर आलम और उमर गौतम
- फोटो : सोशल मीडिया
रजिया ने बताया कि विपुल व कासिफ से मौलाना उमर का कोई लेना देना नहीं था। विजय फरीदाबाद में उमर के एक कार्यक्रम में बस आया था। रजिया का कहना है कि न तो उनका पाकिस्तान और न ही आईएसआई से कोई लिंक है। मौलाना को बस पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
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जांच के लिए पहुंची दिल्ली पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
रजिया ने एक हजार लोगों के धर्म परिवर्तन करवाने की बात से भी इनकार किया। उनका कहना था कि इस्लाम धर्म करने के लिए किसी से जबरदस्ती नहीं की जाती। लोग अपनी मर्जी से इस्लाम कबूल करते हैं। इनमें बड़ी संख्या शादी के लिए धर्म बदलने वाले लड़के-लड़कियों की होती है। मौलाना के बैंक खातों व आईडीसी के खातों से इसका पता चल जाएगा कि उनकी विदेशी फंडिंग हुई या नहीं।
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- फोटो : अमर उजाला।
कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आईडीसी जारी करता है मुस्लिम होने का प्रमाण पत्र...
आईडीसी के साथ जुड़े एक शख्स ने बताया कि आईडीसी किसी को इस्लाम धर्म स्वीकार करवाने के लिए फोर्स नहीं करती है। जो लोग अपनी मर्जी से इस्लाम धर्म स्वीकार करते हैं, आईडीसी उनको मुस्लिम समाज में मान्यता दिलवाने के लिए एक सर्टिफिकेट जारी करती है। लेकिन इससे पूर्व इस्लाम धर्म स्वीकार करने वालों को कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए कहा जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला।
कोर्ट में हलफनामा देकर बकायदा मजिस्ट्रेट से सहमति मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होती है। आईडीसी कुछ भी गैर कानूनी नहीं करती है। जिन लोगों को आईडीसी की ओर से सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं, बकायदा उनका रिकॉर्ड रखा जाता है। इस्लाम धर्म स्वीकार करने वाले जिन लोगों के मन में सवाल होते हैं, उनके लिए शनिवार और रविवार को बटला हाउस स्थित इस्लामिक दावाह सेंटर के दफ्तर में क्लास भी चलाई जाती है, लेकिन वह हमेशा नहीं चलती, जब जरूरत होती है तभी चलाई जाती हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
आज भी लगा था आईडीसी के दफ्तर पर ताला, मौलाना उमर की गिरफ्तारी को लोगों ने बताया गलत...
मौलाना उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी के बाद पूरे जामिया नगर के लोग सख्त नाराज हैं। उनका कहना है कि बिना सबूत की ही पुलिस ने बेकसूरों को गिरफ्तार किया है। अब पुलिस रासुका भी लगाने की तैयारी कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना था कि जानबूझकर राजनैतिक फायदा उठाने के लिए यह सब किया जा रहा है।
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यूपी एटीएस ने धर्म परिवर्तन के आरोप में दो मौलवियों को पकड़ा
- फोटो : ANI
उनको कोर्ट पर पूरा भरोसा है। लोगों का कहना है कि उनको यकीन है कि पुलिस मौलाना के खिलाफ कोई सबूत पेश नहीं कर पाएगी और वह रिहा हो जाएंगे। मंगलवार को भी आईडीसी के दफ्तर पर ताला लटका था। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो कमरों के छोटे से फ्लैट में आईडीसी का दफ्तर चलता है। यहां कभी कभार लोग कानूनी प्रक्रिया के लिए आते हैं।
मौलाना उमर व जहांगीर की गिरफ्तारी असंवैधानिक: अमानतुल्लाह खान
दिल्ली के ओखला विधानसभा से आम आदमी पार्टी के विधायक व दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अमानतुल्लाह खान ने मौलाना उमर गौतम और मौलाना जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताते हुए, इसकी कड़ी निंदा की है। विधायक ने कहा कि दोनों को उनकी विधानसभा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया है। इनकी गिरफ्तारी कर भाजपा यूपी में होने वाले चुनावों में हिंदू-मुस्लिम कर फायदा उठाना चाहती है। खुलेआम संवैधानिक मूल्योंकी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। भाजपा के इस रवैये को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विधायक ने वीडियो की निंदा की। इसके अलावा ट्वीट कर लिखा कि यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा गैर-संवैधानिक तरीके से साम-दाम, दंड-भेद की नीति अपना कर अपनी डूबती नैया को पार लगाना चाहती है।