दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने चावल चिपकाने वाली धातु राइस पुलर के नाम पर ठगी करने वाले 73 वर्षीय बुजुर्ग समेत तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। ये राइस पुलर में लोगों को निवेश कराते थे और उनसे कहते थे कि नासा, डीआरडीओ व इसरो उसे तीन गुना ज्यादा दामों पर खरीदते हैं। आरोपी राइस पुलर को बेचने और उनका परीक्षण कराने के नाम पर ठगी करते थे।
कहा जाता था कि राइस पुलर को नासा व इसरो आदि ने प्रमाणित किया है। आरोपी 100 से ज्यादा लोगों से 10 करोड़ से ज्यादा ठग चुके हैं। हालांकि, अपराध शाखा के पास अभी एक ही पीड़ित है। पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों को सीज करा दिया है, जिनमें छह लाख से ज्यादा रुपये हैं।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त शिबेश सिंह के अनुसार, आदर्श नगर निवासी संजय गुप्ता ने शिकायत की थी कि रेडियोधर्मी नामक दुर्लभ धातु राइस पुलर को बेचने व उसके परीक्षण के नाम पर उससे मुन्नालाल व उसके साथियों ने 11 लाख रुपये ठग लिए हैं। आरोपियों ने कहा था कि ये धातु दुर्लभ है और नासा व इसरो द्वारा प्रमाणित है। ये अंतरराष्ट्रीय बाजार में करोड़ों में बिकती है।
मामला दर्ज कर साबइर सेल एसीपी अरविंद कुमार की देखरेख में इंस्पेक्टर राजीव कुमार की टीम ने जांच शुरू की। पुलिस ने कोलकाता व फरीदाबाद में दबिश देकर कोलकाता निवासी हरेंद्र कुमार उर्फ राजकुमार साईगल (36), पश्चिम बंगाल के 24 परगना निवासी ठाकुरदास मंडल (53) और वार्ड नंबर-9, नांगला एंक्लेव एनआईटी फरीदाबा (हरियाणा) निवासी मुन्नालाल (73) को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपियों के कब्जे से दो लैपटॉप, पांच मोबाइल, छह सिमकार्ड, 14 डेबिट कार्ड, एक पेन ड्राइव, 22 हजार करोड़ जमा कराने का आरबीआई द्वारा जारी फर्जी सर्टिफिकेट, यूनाइटेड नेशन एंटी टेररिस्ट विभाग की ओर से जारी फर्जी सर्टिफिकेट समेत नासा आदि की ओर से जारी फर्जी सर्टिफिकेट बरामद किए गए हैं। पुलिस ने जब कोलकाता में दबिश दी तो बुजुर्ग वहां से फरार होकर फ्लाइट से फरीदाबाद आ गया था। उसे 17 मार्च को फरीदाबाद से गिरफ्तार किया गया है। मुन्नालाल इस गिरोह का सरगना है और 30 साल से ठगी करता है।