अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर दिल्ली की तीनों सीमाओं सिंघु, टीकरी और गाजीपुर में चल रहे किसान आंदोलन की कमान महिलाओं ने थाम रखी थी। तीनों सीमाओं पर हजारों की संख्या में पहुंची महिलाओं ने अपने अधिकारों और किसान आंदोलन में अपने किरदार पर गंभीरता से बात की।
महिलाओं ने ही मंच का संचालन किया और केवल महिलाएं ही बोलीं। गांवों, शहरों से आई छात्रओं, नौजवान व बुजुर्ग महिलाओं ने मंच के माध्यम से अपनी बात रखी। संयुक्त किसान मोर्चा नेता कविता कुरुगूंटी ने कहा महिलाओं ने अपने अधिकारों और कृषि से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात की।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर सिघु बॉर्डर से महिला किसानों ने दुनिया को बता दिया कि भारतीय महिलाएं केवल रसोई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह कृषि विशेषज्ञ भी हैं। वह अपने हक के लिये मजबूती के साथ लड़ना जानती हैं। जिसका जीवंत उदाहरण है कि महिलाओं ने खेती किसानी व तीनों नए कृषि बिलों के मुद्दे पर गंभीरता से अपना पक्ष रखा। महिलाओं ने मोदी सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि हम दिनों दिन मजबूत हो रहे है।
सरकार को यह लगता है कि समय के साथ आंदोलन कमजोर होगा पर किसानों का हौंसला दिनों दिन मजबूत हो रहा है। जब भी जरूरत होगी तब किसान अपनी ताकत दिखाते रहेंगे, लेकिन तीनों कृषि कानून वापस न होने तक वापस नहीं जाएंगे। इस दौरान हरियाणा की महिलाओं ने सिंघु बॉर्डर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया।