राजधानी के लिए दाग बन चुके कूड़े के तीन पहाड़ों के खत्म होने की नए सिरे से उम्मीद जागी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस दिशा में ठोस पहल की है। वह एनटीपीसी के साथ मिलकर अपनी तरह का पहला प्लांट लगाने जा रहा है। इससे कचरे से बिजली, खाद, गैस जैसे उत्पाद तैयार होंगे। आम लोग इनका इस्तेमाल करेंगे। अधिकारियों को इस प्लांट के डेढ़ साल में तैयार होने की उम्मीद है। इसके बाद प्लांट में रोज करीब 2,000 मीट्रिक टन कूड़े का निपटान होगा। उधर, उत्तरी व दक्षिणी दिल्ली नगर निगम भी इसी तरह के दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के साथ हुए करार के तहत एनटीपीसी घोंडा-गुजरान के 42 एकड़ में 12 मेगावाट का प्लांट लगाएगा। यहां दिल्ली का पहला एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन एवं ऊर्जा उत्पादन संयंत्र स्थापित कर कूड़े से बिजली, खाद, कंपोस्ट समेत दूसरी चीजों का उत्पादन होगा। प्रोजेक्ट में एनटीपीसी की 74 व पूर्वी निगम की 26 फीसदी हिस्सेदारी होगी।
अधिकारियों का कहना है कि कूड़े को उसकी प्रकृति के हिसाब से अलग किया जाएगा। सूखे कूड़े से बिजली तैयार होगी, जबकि गीला कूड़ा प्राकृतिक गैस के उत्पादन में इस्तेमाल होगा। बचने वाले ठोस अपशिष्ट कचरे को शास्त्री पार्क स्थित संयंत्र में मिट्टी बनाने के लिए भेजा जाएगा। इस पूरी योजना को सितंबर 2022 तक धरातल पर उतारा जाना है। निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, निगम ने शुरुआत कर दी है। कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद अब इसे धरातल पर उतारना रह गया है।