यूं तो वक्त बड़े से बड़ा जख्म भर देता है, लेकिन दिल्ली दंगों का दर्द भुलाया नहीं जा सकता। उनके लिए तो खासतौर से, जिन्होंने आंखों के सामने अपनों का कत्ल होते देखा। जिन 53 लोगों की हत्या हुई वे किसी एक समुदाय से नहीं थे। दंगे के साल भर बाद भी वे यही सवाल कर रहे हैं कि उनका कसूर क्या था, उन्होंने किसका क्या बिगाड़ा था? दंगों का दर्द उजागर करती शुजात आलम और राजीव कुमार की रिपोर्ट....
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बहकावे में आकर मेरे बेटों को मार डाला...
साहब, मेरे बच्चों ने किसी का क्या बिगड़ा था, दंगाईयों को मेरे बच्चों को मारकर क्या मिला, इससे उनको क्या मिलने वाला है, क्या कोई मुझे बता सकता है...बात करते-करते बाबू खान की आंखों से टप-टप आंसू करने लगे, आज इंसान जानवर से भी बदतर हो गया है, कुछ लोगों के बहकावे में आकर दंगाईयों ने हमारे परिवार को खत्म ही कर दिया।% बाबू खान अपनी बात खत्म वक्त फफककर रो रहे थे, जिनको बेहद मुश्किल से संभाला जा सका।
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आमिर और हाशिम के पिता बाबू खान
- फोटो : अमर उजाला
हिंसा के दौरान 26 फरवरी 2020 को दंगाईयों ने पुराने मुस्तफाबाद के रहने वाले दो सगे भाईयों आमिर खान (30) और हाशिम अली(19) की हत्या कर दी थी। बाद में दोनों के शव व उनकी बाइक को जलाकर नाले में फेंक दिया था। अगले दिन पुलिस को दोनों भाईयों के शव नाले से बरामद हुए थे। बीमार रहने वाले बाबू खान ने बताया कि अब वह सिर्फ अपने बच्चों के लिए जी रहा है,। एक पिता के लिए इससे बड़ा गम क्या होगा कि उसने अपने एक नहीं दो-दो जवान बच्चों के जनाजों को कंधा दिया।
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हाशिम (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
आमिर और हाशिम अपने परिवार के साथ गली नंबर-16/17, पुराना मुस्तफाबाद में रहते थे। इनके परिवार में पिता बाबू खान, मां असगरी बेगम, तीन भाई व तीन बहन हैं। आमिर शादशुदा था, उसके परिवार में पत्नी सबीना के अलावा दो बेटी अल्फीशा और अलीशा थीं। पति की मौत के समय सबीना तीन माह की गर्भवती थी। बाबू खान ने बताया कि आमिर व हाशिम की मां पिछले कुछ दिनों से गाजियाबाद अपने मायके गई हुई थीं। आमिर के नाना की तबीयत खराब थी।
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आमिर (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
आमिर व हाशिम अपने नाना को देखने गाजियाबाद चले गए, लेकिन उस बीच जिले में हिंसा हो गई। परिजनों के कहने पर दोनों गाजियाबाद ही रुके रहे। इस बीच 26 फरवरी की रात को दोनों अपनी बाइक से भागीरथी विहार होते हुए घर लौट रहे थे। इस बीच दंगाईयों ने भागरथी विहार नाले की पुलिया पर उनको रोक लिया। इसके बाद दोनों की बेरहमी से हत्या कर शव को जलाकर नाले में फेंक दिया गया। हत्या से पांच मिनट पहले ही हाशिम की परिवार से बात हुई थी, उसने कहा था कि वह घर के पास ही हैं और पांच मिनट में पहुंच जाएंगे।
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद उनके मोबाइल बंद हो गए। परिवार को शक हुआ तो रात को पीसीआर कॉल गई। इस बीच अगले दिन सुबह पुलिस को दोनों के शव नाले से बरामद हुए। बाबू खान ने बताया कि जब उसको बेटों की पहचान के लिए मोर्चरी बुलाया गया था तो उनकी हालत देखकर उसका कलेजा मुंह को आ गया। उनके शरीर की शायद ही कोई ऐसी हड्डी हो जिसे न तोड़ा गया हो।
हिंसा के बाद का नजारा(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
वारदात के चंद दिनों बाद दिल्ली सरकार ने दोनों बेटों की मौत पर परिवार को दस-दस लाख रुपये दे दिए। बाबू ने बताया कि आमिर की मौत के बाद अगस्त में उसकी पत्नी सबीना ने एक बच्ची को जन्म दिया जो अब छह माह की हो गई है। आंखों में आंसू भरकर बाबू ने कहा कि अब उसका परिवार इन बच्चों के लिए ही जी रहा है। पुलिस से उसने गुजारिश की कि आरोपियों इस मामले में जल्द से जल्द सजा दिलाई जाए।