इस्राइली दूतावास के पास हुए बम धमाके की जगह से बरामद लिफाफे में मिले पत्र कि डीएनए फिंगरप्रिंटिंग जांच से पुलिस सुराग की आस लगा रही है। इस चिट्ठी से मिले डीएनए का मिलान संदिग्धों से कराया जाएगा। इस पत्र में इस्राइली के दो राजदूतों के नाम हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि बदला लेने के लिए किसी इरानी नागरिक ने यह धमाका किया है।
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घटना पर तैनात सुरक्षाबल
- फोटो : शुभम बंसल
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौके से मिले लिफाफे में मिले पत्र में ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी का जिक्र है, जिनकी पिछले साल इराक में बगदाद एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमले में हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा ईरान के टॉप न्यूक्लियर साइंटिस्ट मोहसिन फकीरजादेह का भी नाम है, जिनकी नवंबर 2020 में सैटेलाइट नियंत्रित स्मार्ट सिस्टम मशीनगन का इस्तेमाल कर हत्या की गई थी।
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घटनास्थल से बरामद बॉल बयरिंग
- फोटो : शुभम बंसल
इस पत्र में इन दोनों की हत्या का बदला लेने की बात कही गई है। स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि पत्र अंग्रेजी भाषा में बहुत ही सुंदर तरीके से लिखा है और 10 से 12 लाइनें हैं। डीएनए फिंगर जांच के लिए सुरक्षित रखने के चलते अभी पत्र ज्यादा छेड़छाड़ नहीं की जा रही है। डीएनए जांच कराने के बाद दिल्ली पुलिस इस पत्र के बारे में खुलासा करने की बात कह रही है।
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3डी ऑपरेटर मशीन से स्पेशल सेल पूरे इलाके की मैपिंग करते हुए
- फोटो : शुभम बंसल
वर्ष 2012 के बम धमाके को जोड़कर जांच
दिल्ली के इस्राइली राजदूत की इनोवा कार को 13 फरवरी, 2012 में चुंबक बम से निशाना बनाया गया था। इस बम धमाके की जांच उसी वारदात से जोड़कर की जा रही है। उस वारदात में भी इरानी नागरिकों का नाम सामने आया था। दिल्ली पुलिस उस मामले में किसी को पकड़ नहीं पाई थी। ये ईरानी नागरिक भारत आए थे और धमाके बाद लौट गए थे।
क्या था पेड़ के पीछे मिले खुफिया कैमरे में?
सूत्रों ने धमाका स्थल के करीब एक पेड़ के पीछे एक हिडन कैमरा (गोपनीय कैमरा) मिलने की बात कही है। इस कैमरे को जांच के लिए दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट को भेजा गया था। कैमरे से निकाली गई फुटेज टाइमस्टैंप साल 1970 की पाई गई है, लेकिन इसमें मौजूद वीडियो कंटेंट स्पष्ट नहीं आया है।