जीबी रोड
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शबनम आगे कुछ कहती, उससे पहले बगल में बैठी रेशमा (बदला हुआ नाम) बोल पड़ी, 'यह क्या बताएगी, मुझे तो एक बार दो दिन तक खाना नहीं मिला था। वो तो भला हो, पुलिस वाली दीदी (एसआई किरण सेठी ) का, जो मददगार बनकर आगे आई। 'लॉकडाउन' ने हमारी जिंदगी को ऐसा अनलॉक किया कि 'दो गज' छोड़िए, आज बदनाम गली से 'हजारों गज' दूर जा चुकी हूं। कोविड प्रोटोकाल के लहजे में बात खतम करते-करते वह खिलखिला पड़ी।