माता-पिता समेत परिवार के सात लोगों की हत्या की खूनी दास्तां लिखने वाली यूपी के अमरोहा जिले के बावनखेड़ी नरसंहार की खलनायिका शबनम को मथुरा जेल में फांसी देने की तैयारी चल रही हैं। शबनम आजाद भारत में फांसी पाने वाली पहली महिला बन सकती है। हालांकि शबनम का डेथ वारंट अभी जारी नहीं हुआ है। राज्यपाल को पुन: विचारण दया याचिका भेजे जाने के कारण डेथ वारंट जारी होने की प्रक्रिया रुक गई है।
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शबनम और सलीम
- फोटो : अमर उजाला
वहीं, 14/15 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा जनपद के हसनपुर थानाक्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में प्रेमिका शबनम के साथ मिलकर उसके परिवार के सात लोगों को निर्ममता से मौत के घाट उतारने वाला सलीम फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद भी बेफिक्र है। उसका कहना है कि साहब! काहे परेशान हो रहे हो, इतनी जल्दी मुझे न लगेगी फांसी वासी, यहां ऐसे थोड़े फांसी लग जाती है।
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शबनम और सलीम
- फोटो : अमर उजाला
इतने विकल्प खुले हैं कि हमको फांसी लगते-लगते अभी वर्षों लग जाएंगे। सलीम ने माशूका के कहने पर उसके माता-पिता, दो भाई, एक भाभी, रिश्ते की बहन को कुल्हाड़ी से काट डाला था। यह बातें आज भी वह जेल में साथी बंदियों को बताता है। नवंबर में अपनी दया याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए नैनी जेल में हाई सिक्योरिटी सेल से कार्यालय में लाए गए सलीम से जब वहां एक जेल अधिकारी ने कहा कि अब तो तुम्हें फांसी होकर रहेगी, तो उसने यह जवाब दिया कि यहां बचने के इतने विकल्प है कि फांसी होने में वर्षों लग जाएंगे।
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शबनम
- फोटो : अमर उजाला
जेल में शायरी लिखता है सलीम
परेशान मत होइए साहब, हमें इतनी जल्दी कुछ नहीं होने वाला है। हालांकि जब उसकी प्रेमिका शबनम की दया याचिका राष्ट्रपति के यहां से खारिज हुई तो वह बेचैन हो गया था, लेकिन जैसे ही उसकी फांसी की तारीख एक बार आगे बढ़ी वह फिर से पुराने ढर्रे पर आ गया और शायरी लिखने लगा।
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शबनम की वायरल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
जेल में शबनम को याद करता रहता है सलीम
वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय ने बताया कि सलीम को कोई पश्चाताप न पहले था और न आज है। हालांकि जेल में उनकी जानकारी में उसने ऐसी कोई हरकत नहीं की और न कर रहा है, जिससे कि कोई परेशान है। उसका व्यवहार भी सबसे अच्छा रहता है। साथी कैदियों की मदद भी करता है। पांच वक्त का नमाजी है। हां शबनम को जरूर याद करता रहता है।
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शबनम। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
27 सितम्बर 2018 को बरेली से नैनी सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया था सलीम
सलीम को 27 सितम्बर 2018 को प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल लाया गया था। इससे पहले वो बरेली जेल में बंद था। बरेली की जेल में फांसी की सुविधा नहीं होने की वजह से सलीम को यहां शिफ्ट किया गया था। सलीम जब बरेली की जेल में था तो उस वक़्त वहां के प्रभारी पीएन पांडेय ही थे, जो इस समय नैनी सेंट्रल जेल के सीनियर सुप्रीटेंडेंट हैं। डीआईजी का भी चार्ज देख रहे वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय का कहना है कि सलीम एक प्रशिक्षित कारीगर है। उसने जेल में ही लकड़ी के काम का प्रशिक्षण लिया था। वह बढ़ई का काम बहुत बढ़िया करता है। चूंकि नैनी जेल में लकड़ी का बड़े स्तर पर काम होता है। यहां लकड़ी के फर्नीचर बहुत बनते हैं, इसलिए सलीम ने यहां पर बहुत शानदार फर्नीचर बनाए हैं।
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अमरोहा कांड के बाद की तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
यह था मामला
14/15 अप्रैल 2008 की रात अमरोहा जनपद के हसनपुर थानाक्षेत्र के गांव बावनखेड़ी में प्रेमी सलीम के साथ मिलकर मास्टर शौकत अली की बेटी शबनम ने अपने ही परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी थी। हत्या का शिकार होने वालों में शबनम के पिता शौकत अली, मां हाशमी, भाई अनीस और राशिद, भाभी अंजुम, फुफेरी बहन राबिया थे, जिनके गले कुल्हाड़ी से काटे गए थे, जबकि शबनम के मासूम भतीजे अर्श की गला दबाकर हत्या की गई थी। दरअसल, शबनम और सलीम एक दूसरे से प्यार करते थे, लेकिन शबनम के परिवार को ये रिश्ता मंजूर नहीं था। शबनम ने दो विषयों में मास्टर डिग्री ले रखी थी। वो एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका थी।
जेल में छुप-छुपकर रोती है शबनम
जेल प्रशासन अब तक दावा कर रहा था कि शबनम को मथुरा जेल के उसकी फांसी तैयारी किए जाने के बारे में जानकारी नहीं है, लेकिन उसे अब सब कुछ पता चल चुका है। जेल के सूत्रों की माने तो शबनम ने अब महिला बंदियों और जेल कर्मचारियों से बातचीत करना बंद कर दिया है। वह जेल में अक्सर छुप-छुपकर रोती रहती है। खाने-पीने में भी अब उसका मन नहीं लगता है।