दक्षिण-पूर्व जिले के युवराज सिंह मनचंदा हत्या मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। युवराज हत्याकांड की मुख्य आरोपी युवती आन्या वत्स को हथियार उत्तर प्रदेश के सिपाही ने उपलब्ध कराए थे।
यूपी पुलिस के इस सिपाही ने कहीं से दो हथियार मंगवा कर आन्या को दिलवाए थे। दो हथियारों के बदले युवती ने दो लाख रुपये दिए थे। पुलिस ने दो पिस्तौल में से एक को गुरुग्राम के बादशाहपुर के उस नाले से अगले दिन बरामद कर लिया था, जिस दिन युवराज का शव नाले में मिला। दूसरे हथियार को अब गुरुग्राम से झाड़ियों से बरामद किया गया है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार अभी नाले से दो खोल व एक कारतूस बरामद करना है। लाजपत नगर थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी आन्या वत्स व उसके लिव इन पार्टनर व हत्या की वारदात में आरोपी संयम सचदेवा को शनिवार को साकेत कोर्ट में पेश किया।
युवराज सिंह मनचंदा की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
कोर्ट ने दोनों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए जल्द ही तीसरी बार पुलिस रिमांड पर लाया जाएगा।
न जिपनेट पर डाला और न ही ठीक से कराया पोस्टमार्टम
गुरुग्राम पुलिस की भारी लापरवाही से एक परिवार को उनके जवान बेटे के शव का अंतिम संस्कार करने का हक तक नहीं मिला। हालांकि पीड़ित परिवार ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई है और शीर्ष कोर्ट ने दिल्ली पुलिस व गुरुग्राम पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।
युवराज सिंह मनचंदा की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आया है कि युवराज की गर्दन व उसके नीचे दो गोलियां मारकर हत्या की गई, जबकि गुरुग्राम पुलिस ने डूबने से मौत होने की बात कहकर पोस्टमार्टम ही ठीक से नहीं कराया और न ही शव को मुआयना कराया।
यह था पूरा मामला
दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर में मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या कर शव को गुरुग्राम में फेंक दिया था। गुरुग्राम पुलिस ने शव को अज्ञात समझकर अंतिम संस्कार कर दिया। दिल्ली पुलिस ने हत्या करने के आरोप में 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की दोस्त रही और पहले साथ काम चुकी युवती आन्या वत्स और उसके दोस्त संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था।
युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड के आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
शुरुआती जांच में युवराज की हत्या का कारण पैसे का लेने-देन बताया गया। हालांकि आरोपी युवती बार-बार अपने बयान बदलती रही। दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि युवराज के गायब होने की शिकायत सरिता विहार, दिल्ली में रहने वाली उसकी बहन हरसिमरन मनचंदा 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में दर्ज कराई थी।
पीड़ित बहन ने कहा था कि छह सितंबर को अपने भाई के साथ सेंट्रल मार्केट, लाजपत नगर व गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट, के-ब्लॉक, लाजपत नगर-दो गई थी। शाम लगभग 4:00 बजे, युवराज यह कहकर रेस्टोरेंट से चले गए कि उनकी गुरुग्राम में पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स के साथ एक मीटिंग है।
Yuvraj Murder Case
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
रात 10 बजे तक तक युवराज नहीं लौटे। उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। लाजपत नगर थाना पुलिस को जांच में पता लगा कि युवराज ने आखिरी बार अपनी पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स से बात की थी। जांच में अन्या वत्स के एक नए मोबाइल नंबर का पता चला। जांच के बाद से उसके साथी संयम सचदेवा के साथ गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी युवती ने बताया कि उसने युवराज की हत्या अपनी क्रेटा कार में दो गोली गर्दन में मारकर की है। आरोपियों ने बताया कि युवराज के शव को गुरुग्राम में फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस को पता लगा कि गुरुग्राम के बादशाहपुर पुलिस स्टेशन ने अपने इलाके में एक नाले से एक अज्ञात लाश बरामद की थी।
Yuvraj Murder Case
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गुरुग्राम में 11 सितंबर को सीवर से बरामद हुआ था शव
मृतक की तस्वीरों से बहन ने युवराज के रूप में पहचान की थी। तस्वीरों में दिख रहे कपड़ों और शारीरिक हुलिए से भी इस पहचान की पुष्टि हुई। युवराज का शव बादशाहपुर थाना इलाके में 11 सितंबर को सीवर में सड़ी गली हालत में मिला था। शव को तीन दिन तक पहचान के लिए रखवाया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पहचान न होने पर 14 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद शव का पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया था।