किसी भी राज्य की सरकार और उसकी कार्यप्रणाली विधानसभा पर निर्भर करती है। यहीं जनता के अधिकारों, कर्त्तव्यों और जिम्मेदारियों के लिए नियमों और कानूनों का ककहरा भी तैयार होता है। जाहिर है जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए विधानसभा के पास कुछ विशेषाधिकार, शक्तियां और सीमाएं भी हैं। लेकिन अगर ये शक्तियां, सीमाएं और विशेषाधिकार भी कम पड़ जाए तो हालात बेकाबू हो जाते हैं।
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साल 2015 में यूं लगी विशेष सत्र की कतार, दिखे जोरदार हंगामे
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ऐसे ही कई किस्से साल 2015 में दिल्ली विधानसभा में भी देखने को मिले। विधानसभा में आम सत्र के अलावा लगातार विशेष सत्र भी होते रहे और जबरदस्त बहस भी देखने को मिली। इन सबके बीच हंगामें भी खूब हुए, बात चाहे फिर भाजपा विधायकों को मार्शलों के द्वारा बाहर निकालने की हो या महिला सदस्यों द्वारा विधानसभा स्पीकर पर दबाव बनाने के तरीके की ही क्यों न हो, तो आइए डालते हैं एक नजर साल 2015 में दिल्ली विधानसभा की उन गर्मा-गर्म बहस और विशेष सत्र की जिनसे जमकर हंगामा बरपा।
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केजरीवाल और नजीब की जंग में बुलाया विशेष सत्र- दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग के साथ अपनी तकरार को तेज करते हुए दिल्ली सरकार ने केंद्र की अधिसूचना पर 27 और 28 मई को दिल्ली विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाया। इस अधिसूचना के तहत केंद्र ने नौकरशाहों की नियुक्ति में उपराज्यपाल को पूर्ण शक्ति प्रदान की और स्पष्ट किया कि पुलिस एवं जन व्यवस्था जैसे विषयों पर उन्हें मुख्यमंत्री से बात करने की कोई जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार के एंटी करप्शन ब्यूरो को भी केंद्र सरकार के अधिकारियों एवं राजनीतिक पदाधिकारियों के खिलाफ कोई मामला दर्ज करने से रोक दिया गया था।
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अधिसूचना जारी होने के बाद केजरीवाल ने केंद्र पर करारा हमला बोला और विधानसभा में अधिसूचना के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। केजरीवाल ने केंद्र पर पिछले दरवाजे से दिल्ली को चलाने तथा भ्रष्ट लोगों की रक्षा के लिए उपराज्यपाल के पक्ष में खड़ा होकर शहर के लोगों की पीठ में छूरा घोंपने का आरोप लगाया था। विशेष सत्र में विधायक सोमनाथ भारती की तरफ से केंद्र की जारी अधिसूचना को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार देने, सांसदों को पत्र लिखे जाने का प्राइवेट मेंबर प्रस्ताव पास कराया। भाजपा विधायकों ने विशेष सत्र में सांकेतिक वॉकआउट किया।
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विजेंद्र गुप्ता की ओर से नियम 114 में निंदा प्रस्ताव के प्रावधान नहीं होने का जिक्र करके स्वीकार नहीं किया गया। प्रस्ताव पास किए जाने के पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के अलावा मंत्री गोपाल राय ने केंद्र व उपराज्यपाल पर खूब हमले किए। इसके अलावा प्रस्ताव पर भाजपा के तीन विधायक समेत करीब दो दर्जन विधायकों ने अपनी बात रखी।
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चर्चा में विधायक मदनलाल ने यहां तक कह दिया कि अगर दिल्ली सरकार के पास अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग की शक्ति नहीं तो फिर विधानसभा इन्हें वेतन भी क्यों दे। इस पर सभी आप विधायकों ने समर्थन का शोर मचाया। काम प्रभावित हो रहा है। मैं आश्वस्त करता हूं कि सरकार अधिसूचना को लेकर ऐसा कुछ नहीं करेगी। चर्चा की शुरुआत में नेता प्रतिपक्ष समेत सभी तीन भाजपा विधायकों ने बिजली-पानी जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की मांग करके नारे लिखी फाइलें और काली पट्टी के साथ विरोध दर्ज कराया।
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मीनाक्षी हत्याकांड के बाद महिला सुरक्षा पर विशेष सत्र- ये सत्र 28 जुलाई 2015 को बुलाया गया था। लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के निधन के चलते सदन की कार्रवाई पूर्व राष्ट्रपति को श्रृदांजलि देकर स्थगित की गई। इसके बाद ये सत्र 3 अगस्त 2015 को बुलाया गया। दिल्ली के आनंद पर्वत में मीनाक्षी नाम की लड़की की उसके पड़ोस में ही रहने वाले दो युवकों ने सरेराह चाकू घोंपकर हत्या कर दी थी।
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इसके बाद दिल्ली में एक बार फिर महिला सुरक्षा को लेकर सवाल उठे और केजरीवल सरकार से महिला सुरक्षा पर उनके दावों को लेकर हमले हुए। अरविंद केजरीवाल ने इस मुद्दे पर दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बी एस बस्सी को भी तलब किया था। सीएम केजरीवाल ने वीडियो और अखबारों में विज्ञापन देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस मामले में घसीटा। केजरीवाल ने महिलाओं अपराधों का ठीकरा दिल्ली पुलिस पर फोड़ा और पीएम से अपील की कि या तो वो हर हफ्ते दिल्ली की कानून व्यवस्था को लेकर एक घंटा दें या दिल्ली पुलिस को दिल्ली सरकार के अधीन कर दें।
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हालांकि महिला सुरक्षा पर बुलाया गया ये सत्र भी राजधानी में महिलाओं को सुरक्षा का भरोसा दिलाने में नाकाम रहा और सदन में जमकर हंगामा हुआ। इस सत्र में महिलाओं से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई नहीं होने की जांच के लिए आयोग बनाने की सिफारिश की। भाजपा ने आयोग के फैसले को गैरकानूनी और असवैंधानिक बताया। जबकि सरकार की ओर से महिला अपराधों के लिए केंद्र को जिम्मेदार ठहराया गया। केजरीवाल ने पीएम मोदी, एलजी नजीब जंग, पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी और मुकेश कुमार मीणा को दिल्ली सरकार के रास्ते के स्पीड ब्रेकर करार दिया।
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वहीं आम आदमी पार्टी के विधायक महिलाओं पर सोमनाथ भारती की टिप्पणी पर भी खूब विवाद हुआ। भारती ने विधानसभा सत्र के दौरान कहा था कि अगर AAP सरकार को पुलिस का नियंत्रण मिलता है तो आधी रात में भी ‘सुंदर महिलाएं’ बाहर निकल सकेंगी। जिससे महिलाओं को लेकर भारती के 'सुंदर कांड' पर जमकर बवाल हुआ।
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डीडीसीए में कथित घोटाले और सीबीआई रेड पर विशेष सत्र- डीडीसीए में कथित घोटाले और सचिवालय पर सीबीआई छापे को लेकर दिल्ली सरकार ने 22 दिसंबर को विशेष सत्र बुलाया। एक दिन के विशेष सत्र में विधानसभा में राजेंद्र कुमार के घर और दफ्तर पर सीबीआई द्वारा छापा मारने पर निंदा प्रस्ताव पास किया गया। जबकि डीडीसीए में धांधली के आरोप पर जांच आयोग बनाने का प्रस्ताव भी पास किया गया। बीजेपी विधायकों ने इस आयोग का विरोध किया। बीजेपी ने कहा कि कंपनी एक्ट में रजिस्टर्ड डीडीसीए की जांच कमीशन नहीं कर सकता है।
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दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर विशेष सत्र के बहाने मोदी सरकार पर जमकर हमला बोला। केजरीवाल ने कहा है कि प्रधान सचिव के बहाने उनके दफ्तर पर छापेमारी की गई। दिल्ली के सीएम केजरीवाल डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार को लेकर जेटली पर भी तीखे बोल कहे।उन्होंने कहा कि कोर्ट में जाकर जेटली ने अच्छा किया और सब साफ हो जाएगा। कोर्ट का नजारा शानदार होगा। जेटली ने मानहानि का केस करके अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी है।
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साल 2015 में विशेष सत्र के अलावा हर विधानसभा सत्र में भी जोरदार हंगामे होते रहे। दिल्ली विधानसभा में भाजपा विधायकों को कई बार मार्शलों के द्वारा बाहर किया गया। इस दौरान सदन में अजीब माहौल नजर आया।
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भाजपा विधायक के निष्कासन और अलका लांबा पर की गई उनकी टिप्पणी पर भी जमकर बवाल देखने को मिला। विधायक के खिलाफ अलका लांबा विधानसभा के वैल में आकर बैठ गई और विधायक के निष्कासन की मांग की। कुल मिलाकर साल 2015 में दिल्ली विधानसभा में कई दृश्यों में लोगों ने हंगामों और विवादों का अलग ही रूप दिखा।