आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए नोएडा अथॉरिटी के पूर्व चीफ इंजीनियर यादव सिंह को आज गाजियाबाद के सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया। यहां उनकी सुरक्षा को लेकर काफी एहतियात बरती गई।
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कड़ी सुरक्षा के बीच मीडिया से मुंह छिपाते कोर्ट में पेश हुए यादव सिंह
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यादव सिंह की गिरफ्तारी के बाद आज उन्हें दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर कोर्ट में पेश किया गया। उनकी पेशी के चलते सीबीआई कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था टाइट कर दी गई है। यहां रोज से अधिक पुलिस बल की नियुक्ति की गई है ताकि किसी भी प्रकार की स्थिति से निपटा जा सके।
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बता दें कि उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया। सीबीआई उन्हें टवेरा कार में कोर्ट लेकर आई और वो सीधे कोर्ट परिसर में जाकर ही रुकी। मालूम हो कि कोर्ट परिसर में गाड़ी को तब ही प्रवेश दिया जाता है जब सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील मामला हो।
कड़ी सुरक्षा के बीच मीडिया से मुंह छिपाते कोर्ट में पेश हुए यादव सिंह
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जानकारी के अनुसार कोर्ट में मीडिया का प्रवेश वर्जित है। मीडिया अदालत परिसर के बाहर ही खड़ी है।
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कड़ी सुरक्षा के बीच मीडिया से मुंह छिपाते कोर्ट में पेश हुए यादव सिंह
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सूत्र बताते हैं कि करीब एक साल के दौरान यादव
सिंह ने राजनीतिक आकाओं के दर पर मत्था टेका, लेकिन हर जगह निराशा लगी।
सीबीआई से बचने के लिए यादव सिंह ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। यादव
सिंह तो सिर्फ मोहरा थे। पर्दे के पीछे तो कोडवर्ड में पंडितजी और भाईसाहब
ही थे। उन्हीं के इशारों पर यादव सिंह काम किया करते थे।
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सूत्र बताते हैं कि सीबीआई द्वारा पूछताछ के दौरान दोनों नाम यादव
सिंह ने कबूले हैं। किसके पास कितनी अकूत संपत्ति है और कैसे खरीदी गई, यह
भी यादव सिंह ने खोल दिया है।
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यह रहस्य कम नहीं है कि यादव सिंह सोशल मीडिया
से दूर रहे। एक या दो फोटो ही सुर्खियों में रहीं। इसके अलावा एक साल तक
सीबीआई ने समय-समय पर पूछताछ भी जारी रखी। यादव सिंह को किसी ने न तो घर में घुसते देखा और न ही निकलते। कहीं कोई देख न ले, इसलिए छिपते-छिपाते उन्होंने एक साल गुजारा। यादव सिंह की पावर के कारण ही आईएएस अधिकारी उनके दरबार में हाजिरी लगाने जाते थे। जो कह दिया वही, प्राधिकरण में कानून बन जाता था। किस
नेता को टिकट लेना है, तय करने में यादव सिंह का भी हाथ रहता था। सूत्र
बताते हैं कि यादव सिंह का इरादा था कि पहले पैसे कमा लो, इसके बाद नेता
बनेंगे, लेकिन वक्त को कुछ और ही मंजूर था।