बेटी बचाने की मिसाल पेश करने वाली अविवाहित डॉक्टर ने अपनी नन्हीं परियों को काजू और किशमिश नाम दिए हैं। नवजात जुड़वां बेटियों को लेकर डॉक्टर मां फर्रुखाबाद लौट गई हैं।
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मिलना नहीं चाहेंगे बिनब्याही डॉक्टर मां की इन नन्हीं परियों से
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डीएम-एसएसपी सहित जिले के अन्य अफसरों ने भी डॉक्टर की इस पहल की सराहना की है। मां के ठुकराने के बाद गुलावठी गांव के ईसेपुर निवासी डॉ. कोमल यादव पुत्री सीताराम यादव ने जुड़वां बच्चियों को गोद लिया था।
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फर्रुखाबाद के एक निजी अस्पताल में जन्म देने के बाद जुड़वां बेटियों को छोड़कर उनकी मां चली गई थी। इसके बाद वहां तैनात अविवाहित चिकित्सक डॉ. कोमल ने दोनों को गोद ले लिया।
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सोमवार को डॉक्टर कोमल उन्हें लेकर अपने गांव ईसेपुर आई थीं। बेटी की इस पहल को परिजनों और ग्रामीणों ने काफी सराहा। डॉ. कोमल ने बताया कि उन्होंने दोनों बेटियों को काजू और किशमिश नाम दिए हैं।
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कहा कि ‘जैसे मुझे काजू और किशमिश बहुत पसंद हैं वैसे ही मुझे मेरी बेटियां भी बहुत पसंद हैं...।’ डॉ. कोमल ने बताया कि वह दोनों बेटियों को पढ़ा-लिखाकर योग्य बनाएंगी और उसी व्यक्ति से शादी करेंगी जो उनकी बेटियों को अपनाने के लिए तैयार होगा।
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बुधवार को डॉ. कोमल अपनी दोनों बेटियों को साथ लेकर फर्रुखाबाद लौट गईं।
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डॉ. कोमल एक निजी अस्पताल में चिकित्सक के पद पर तैनात हैं। ऐसे में बच्चियों की देखभाल बड़ा प्रश्न था। डॉ. कोमल ने बताया कि उन्होंने दो आया रखी हैं। एक आया दिन में और एक आया रात में बच्चियों की देखभाल करेगी। ड्यूटी के बाद वह अपना सारा समय अपनी बच्चियों को देंगी।