बकौल दो बेटियों की मां दीपा ने बताया कि दिव्यांगों के लिए देश में खेलों में अलग मुकाम दिलाना मेरा लक्ष्य था, आज जब मुझे देखकर लोग मेरे नाम से मुझे आवाज देते हैं तो खुशी होती है। उन्होंने कहा कि शारीरिक अक्षमता कोई कमी नहीं है बस, आपको अपना दिल मजबूत करने की जरूरत है। गुरुग्राम खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग में बतौर पैरा कोच दीपा ने बताया कि आज के समय में लिंगभेद खत्म हो गया है, बस महिलाओं को अपने दिल से इस बात को निकालने की जरूरत है। आपकी मेहनत आपको एक नया मुकाम दिलाएगी।