अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर भारत आने पर बराक ओबामा को गार्ड ऑफ ऑनर दिलाने वाली महिला एयरफोर्स अधिकारी पूजा ठाकुर एक नई मुसीबत में फंस गईं हैं।
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उस वक्त भले ही पूजा ठाकुर को देश का मान बढ़ाने वाली और महिलाओं की नई आइकन की तरह पेश किया गया था लेकिन फिलहाल वो अपने ही देश में सरकार से एक लड़ाई लड़ रही हैं।
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असल में 2015 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गार्ड ऑफ ऑनर दिलाने वाली पूजा ठाकुर का मामला ऑर्मड फोर्स टिब्युनल (AFT) में चल रहा है। असल में उन्हें अभी तक इंडियन एयर फोर्स में परमानेंट कमीशन नहीं मिल पाया है।
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इस बीच उन्हें एक नया आदेश मिला है कि दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के जिस सरकारी आवास में रह रही हैं उसे तत्काल खाली कर दें। पूजा ने यहां भी हार नहीं मानी और इस आदेश को भी चुनौती दे दी। सोमवार को उन्हें इस आदेश पर स्टे मिल गया है।
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बता दें कि ठाकुर को एयरफोर्स की ओर से नई दिल्ली के द्वारका में सरकारी आवास दिया गया था। पिछले साल सितंबर में उनका शॉर्ट कमीशन का कार्यकाल खत्म होने के बाद आवास खाली करने का आदेश दिया गया।
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इस बीच डिफेंस कोर्ट में परमानेंट कमीशन के लिए उनका केस विचाराधीन है। हालांकि घर खाली करने के आदेश पर जब उन्होंने कोर्ट में सवाल खड़ा किया तो उन्हें इस मामले के निबटारे तक उसी घर में रहने की इजाजत दे दी गई।
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2015 में ओबामा के भारत दौरे के बाद से पूजा ठाकुर सुर्खियों में आ गईं क्योंकि पहली बार किसी महिला अधिकारी ने इंटर सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर का नेतृत्व किया था। हालांकि जुलाई 2016 से उनके और भारतीय वायु सेना के बीच न्यायिक विवाद जारी है क्योंकि वायु सेना ने उन्हें परमानेंट कमीशन देने से इनकार कर दिया था।
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क्या है मामला: असल में भारतीय वायु सेना में किसी भी अधिकारी को परमानेंट कमीशन दिया जा सकता है और ये हक महिला अधिकारियों को भी हासिल है।
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pooja thakur
ठाकुर ने सेना के इसी फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है जबकि सेना का कहना है कि उन्हें पहले ही ये मौका दिया गया था जिसे स्वीकार करने से उन्होंने मना कर दिया था। अब उन्हें दोबारा मौका नहीं दिया जा सकता है।
हालांकि उनके वकील का कहना है कि उस वक्त उनकी परिस्थितियां ऐसी नहीं थी कि वो कोई फैसला ले सकती लेकिन इस आधार पर उन्हें परमानेंट कमीशन देने से इनकार करना पक्षपातपूर्ण है।