फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ये हैं वो 5 कारण क्यों जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद से डर रही है बीजेपी सरकार

Wed, 10 Jan 2018 10:43 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 6
देश में तेजी से लोकप्रिय हो रहे दलित नेता जिग्नेश मेवाणी और जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्र उमर खालिद की युवा हुंकार रैली को दिल्ली पुलिस ने इजाजत देने से मना कर दिया। ये दोनों दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पर युवा हुंकार रैली का आयोजन करना चाहते थे जिसके माध्यम से वह भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद को रिहा कराने और अन्य अधिकारों पर चर्चा करना चाहते थे। तेजी से लोकप्रिय हो रहे जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद की जोड़ी के बारे में यह कयास लगाया जा रहा है कि ये दोनों देश की राजनीति में दलित-मुस्लिम गठजोड़ को एक नया चेहरा देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि इन दोनों पर देश को बांटने और भड़काने का आरोप भी लग रहा है। जिग्नेश मेवाणी और उमर खालिद पर महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में भड़काऊ भाषण देने का आरोप भी लगा है और दोनों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। तेजी से लोकप्रिय हो रही इस जोड़ी को लेकर पांच सवाल खड़े किए जा रहे हैं...
विज्ञापन

2 of 6
जिग्नेश मेवानी
(1) गुजरात में पटेल आंदोलन और महाराष्ट्र के भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा के बाद ये सवाल खड़ा किया जा रहा है कि क्या जिग्नेश मेवाणी असल में ऐसे दलित नेता के तौर पर उभर रहे
हैं जिन्हें पूरे देश का दलित वर्ग स्वीकार करता है। यही सवाल उमर खालिद के बारे में भी पूछा जा रहा है। हालांकि इसका असल जवाब इनकी रैलियों में आने वाली भीड़ और इस वर्ग के
बीच जाने के बाद ही पता चल सकता है।
विज्ञापन

3 of 6
- फोटो : Amar Ujala
(2) क्या देश में मौजूदा दलित-मुस्लिम नेतृत्व से यह दोनों वर्ग खुश हैं? मायावती, रामविलास पासवान, उदित राज या मुस्लिम नेता आजम खान या ओवैसी बंधु को इस वर्ग का नेता माना जाता है। इन नेताओं का सीमित होता दायरा भी जिग्नेश और उमर की लोकप्रियता बढ़ने का कारण माना जा रहा है। जिग्नेश की विधानसभा चुनाव में जीत भी इसी ओर इशारा करती है।

4 of 6
जिग्नेश - फोटो : SELF
(3) जिग्नेश और उमर जैसे नेताओं की युवओं में बढ़ती लोकप्रियता के पीछे एक बड़ा कारण ये भी माना जा रहा है कि ये दोनों उच्च शिक्षित होने के साथ ही वर्ल्ड पॉलिटिक्स के बारे में भी
बेहतर समझ रखते हैं और जरूरत पड़ने पर अंग्रेजी में भी धाराप्रवाह बात कर सकते हैं। तो क्या युवाओं में इनकी लोकप्रियता के पीछे ये तथ्य भी जिम्मेदार हैं? 
विज्ञापन

5 of 6
- फोटो : SOCIAL MEDIA
(4) राजनीति में युवा नेतृत्व का उभरना कोई नई बात नहीं है। ऐसा पहले भी होता रहा है चाहे बात जॉर्ज फर्नान्डीज की हो या लालू-मुलायम-मायावती की। ऐसे में यह सवाल भी खड़ा
होता है कि क्या यह दोनों देश का नया युवा नेतृत्व तैयार कर रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
जिग्नेश मेवानी - फोटो : Self
(5) राजनीति में किसी नए नेता या पार्टी की स्थापना में पहली बड़ी चुनौती होती है स्थापित सत्ता और सरकार के खिलाफ आवाज उठाना और संघर्ष करना। इस संघर्ष का परिणाम ही तय
करता है कि किसी नेता और पार्टी का भविष्य क्या होगा? इसलिए अब बड़ा सवाल ये है कि स्थापित सत्ता इनका सामने करने के लिए कौन सी रणनीति और जनता उसे किस तरह स्वीकार करती है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें