दिल्ली का नाम जब कभी भी लिया जाता है, तो उसके साथ एनसीटी या एनसीआर का भी उल्लेख होता ही है। कई सरकारी दस्तावेजों पर आपने अक्सर दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन (Government Of NCT Of Delhi) लिखा हुआ देखा होगा। इसके अलावा जब कभी भी राजधानी की चर्चा होती है, आपने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (National Capital Region) का नाम भी सुना होगा। आपके मन में भी अक्सर यह प्रश्न आता होगा कि यह एनसीटी और एनसीआर क्या है। क्या यह दोनों एक ही चीज है या इसमें कोई अंतर है। हम आपको बता रहे हैं क्या है एनसीटी और एनसीआर और इनमें क्या अंतर है?
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इंडिया गेट
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स्वतंत्रता के बाद देश के सभी राज्यों को तीन वर्गों में बांटा गया- पार्ट-ए, पार्ट-बी और पार्ट-सी। यहां दिल्ली को पार्ट-सी में रखा गया। साल 1956 तक दिल्ली का कामकाज भी देश के अन्य राज्यों की तरह ही चलता था, लेकिन राज्य पुनर्गठन आयोग आने के बाद राज्यों का बंटवारा एक नए तरीके से किया गया।
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लाल किला
- फोटो : PTI
इसमें दिल्ली को केंद्रशासित प्रदेश (UT - Union Territory) घोषित कर दिया गया। इसका यह मतलब हुआ कि दिल्ली में राज्य सरकार और केंद्र सरकार संयुक्त रूप से काम करेंगी। इसके साथ ही दिल्ली में विधानसभा भी भंग कर दी गई थी।
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लाल किला
विधानसभा भंग होने के 35 सालों के बाद 1991 में संविधान के 69वें संशोधन द्वारा दिल्ली में दोबारा विधानसभा का गठन किया गया। इस बीच (35 सालों तक) दिल्ली में विधानसभा चुनाव ही नहीं हुए थे। इस विधेयक में दिल्ली को देश की राजधानी होने के नाते केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष दर्जा दिया गया है। दिल्ली को 01 फरवरी 1992 को नया नाम 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT - National Capital Territory) दिल्ली' दिया गया। ये बदलाव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र अधिनियम (NCT Act) के तहत किया गया।
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जामा मस्जिद
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दिल्ली में 70 विधानसभा सीटें हैं। साल 1991 में आए अधिनियम के हिसाब से केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर शासन करना होता है, यानी यहां संयुक्त प्रशासन होता है। इसी संयुक्त प्रशासन प्रणाली द्वारा काम किए जाने के दौरान कई बार परेशानियों की स्थिति भी बन जाती है।
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राज घाट
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कारण यह है कि इसमें कुछ शक्तियां केंद्र सरकार को और कुछ राज्य सरकार को दी गई हैं। इससे दोनों सरकारों के बीच आपसी सामंजस्य न होने से क्षेत्र के विकास में भी समय-समय पर गतिरोध पैदा होता रहता है। दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार एक-दूसरे पर काम न करने के आरोप लगाती रहती है, जिसका असर दिल्ली के विकास पर पड़ता है।
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कनॉट प्लेस
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एनसीआर को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाता है। एनसीआर में भारत के वो महानगरीय क्षेत्र आते हैं, जो दिल्ली के आस-पास बसे हैं। इसमें ज्यादातर वो शहर शामिल हैं जिनसे भौगोलिक रूप से दिल्ली घिरी हुई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, 1985 के नियोजन बोर्ड के कानून के अनुसार, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कुल 23 जिलों को एनसीआर में शामिल किया गया था।
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संसद
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साल 1962 में दिल्ली के लिए पहले मास्टर प्लान में यह सिफारिश की गई थी कि दिल्ली का बड़ा क्षेत्र और आसपास के शहरों को दिल्ली की आबादी के दबाव को कम करने के लिए एक महानगरीय क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाए। इसी के लिए एनसीआर का विकास किया गया था।
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दिल्ली
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आसान शब्दों मे समझा जाए तो, एनसीआर का विकास इसलिए किया गया कि दिल्ली पर कम दबाव पड़े। दिल्ली में अधिक संभावनाएं होने के कारण ज्यादा लोग यहां आते हैं। दिल्ली का क्षेत्रफल कम होने की वजह से इससे सटे क्षेत्र का विकास किया गया और इसे एनसीआर (NCR) नाम दिया गया।
एनसीआर में हरियाणा के भिवानी, चरखी, दादरी, फरीदाबाद, गुड़गांव, झज्जर और बहादुरगढ़, महेंद्रगढ़, पानीपत, रेवाड़ी, रोहतक, सोनीपत, मेवात, पलवल, जींद, करनाल और नूंह जिले आते हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के, बागपत, बुलंदशहर, गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, मेरठ, हापुड़ और शामली को भी एनसीआर में शामिल किया गया है। इनके अलावा राजस्थान के अलवर और भरतपुर जिले भी एनसीआर में आते हैं।